धमतरी स्थित गंगरेल बांध के 6 गेट खोले गए, 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। प्रशासन ने डाउनस्ट्रीम गांवों को अलर्ट किया, किसानों और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील।
धमतरी । लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के कारण धमतरी जिले स्थित गंगरेल बांध के 6 गेट खोल दिए गए हैं। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे जल संसाधन विभाग ने 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा। अचानक गेट खोले जाने से बांध के डाउनस्ट्रीम इलाके के गांवों में अलर्ट जारी किया गया है।
गंगरेल बांध प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में से एक है, जो न केवल धमतरी बल्कि रायपुर और आसपास के जिलों को सिंचाई व पेयजल की आपूर्ति करता है। जलाशय में लगातार पानी भरने से उसका स्तर निर्धारित सीमा तक पहुंच गया, जिसके चलते अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा।
गंगरेल बांध का महत्व
गंगरेल बांध, जिसे रविशंकर सागर परियोजना भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा माना जाता है।
- इसका निर्माण महानदी पर किया गया है।
- धमतरी, दुर्ग, रायपुर और महासमुंद जिलों में लाखों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई इसी से होती है।
- रायपुर शहर की बड़ी आबादी को पीने का पानी भी इसी बांध से मिलता है।
- उद्योगों को भी पानी की आपूर्ति यहीं से की जाती है।
इस कारण से गंगरेल बांध में जलस्तर का संतुलन बनाए रखना सरकार और प्रशासन के लिए बेहद अहम है।
बारिश का असर और जलस्तर
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई है।
- धमतरी और बस्तर इलाके में नदियों का जलस्तर बढ़ा।
- गंगरेल बांध में पानी का स्तर 357.80 मीटर तक पहुंच गया, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 358.10 मीटर है।
- खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने एहतियातन गेट खोलने का फैसला किया।
सुरक्षा और अलर्ट
गेट खोले जाने के बाद डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
- महानदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे गांवों में लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है।
- निचले क्षेत्रों के किसानों को अपनी फसल और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की अपील की गई है।
- जिला प्रशासन ने आपातकालीन दलों को तैयार रहने का निर्देश दिया है।
किसानों और ग्रामीणों पर असर
किसानों का कहना है कि बांध से पानी छोड़े जाने से उनके खेतों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। हालांकि सिंचाई के लिहाज से यह पानी वरदान भी साबित होगा।
- कुछ किसानों का कहना है कि धान की फसल को अब भरपूर पानी मिलेगा।
- वहीं, नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों ने कहा कि वे लगातार पानी के स्तर पर नजर रखे हुए हैं।
अधिकारियों का बयान
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह एक नियमित प्रक्रिया है। जब भी जलस्तर तय सीमा से ऊपर जाता है, तब गेट खोलना जरूरी हो जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल खतरे की कोई स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।
पर्यटन पर प्रभाव
गंगरेल बांध धमतरी का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है।
- मानसून के दौरान यहां का नजारा बेहद आकर्षक होता है।
- गेट खुलने पर पानी की तेज धार देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा घेरा लांघकर पानी के पास न जाएं।
भविष्य की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम पैटर्न और भारी बारिश की वजह से आने वाले दिनों में बांध प्रबंधन और चुनौतीपूर्ण होगा।
- समय रहते पानी छोड़ा गया तो सिंचाई और जलापूर्ति पर असर नहीं पड़ेगा।
- देर करने पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
निष्कर्ष जैसा प्रभाव (बिना लिखे)
गंगरेल बांध के गेट खोलना एक एहतियाती कदम है, जो जल प्रबंधन और सुरक्षा दोनों के लिहाज से जरूरी है। इसका असर किसानों, ग्रामीणों और पर्यटकों तीनों पर पड़ेगा।






