रायपुर मेडिकल कॉलेज में 80 सीट का हॉस्टल, जरूरत 1000 की। विरोध के बाद प्रबंधन अब फर्स्ट ईयर के 200 छात्रों के लिए मकान खोज रहा है।
रायपुर। राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज में छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी गंभीर समस्या बन गई है। कॉलेज प्रशासन के पास जहां केवल 80 सीटों वाला हॉस्टल है, वहीं जरूरत करीब 1000 छात्रों की है। इस असमानता के कारण नए सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
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सूत्रों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को हाल ही में छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें लगातार मिल रही थीं कि पर्याप्त हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। विरोध को देखते हुए अब प्रबंधन ने समाधान की दिशा में कदम उठाते हुए फर्स्ट ईयर के 200 छात्रों के लिए सर्वसुविधायुक्त मकान किराए पर लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
छात्रों की परेशानी
फर्स्ट ईयर एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्र हॉस्टल न मिलने की स्थिति में शहर के अलग-अलग हिस्सों में किराए पर मकान ढूंढने को मजबूर हैं। कई छात्र और उनके परिजन सुरक्षा और परिवहन की समस्या को लेकर चिंतित हैं। विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने मांग रखी कि उन्हें कॉलेज कैंपस के नजदीक सुरक्षित और बेहतर आवास मिलना चाहिए।
प्रबंधन का कदम
विरोध बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने माना कि वर्तमान में हॉस्टल की क्षमता छात्रों की संख्या के हिसाब से बेहद कम है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन अब शहर के भीतर बड़े मकानों और अपार्टमेंट्स की तलाश कर रहा है, जिन्हें अस्थायी रूप से हॉस्टल के रूप में उपयोग किया जा सके। बताया जा रहा है कि इन मकानों में भोजनालय, अध्ययन कक्ष और परिवहन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
दीर्घकालिक योजना
अधिकारियों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था छात्रों की तत्काल समस्या को हल करने के लिए की जा रही है। वहीं, दीर्घकालिक समाधान के तहत 1000 सीटों की क्षमता वाला नया हॉस्टल बनाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
विरोध की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ दिनों से कॉलेज में अभिभावक और छात्र लगातार विरोध जता रहे थे। उनका कहना था कि कॉलेज में दाखिले की संख्या बढ़ाई जा रही है, लेकिन हॉस्टल सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया। छात्रों ने चेतावनी दी थी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
छात्रों की उम्मीद
अब जबकि कॉलेज प्रबंधन ने मकान किराए पर लेने की प्रक्रिया शुरू की है, छात्रों में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द दीर्घकालिक समाधान निकाला जाए ताकि उन्हें पढ़ाई के दौरान आवास की समस्या का सामना न करना पड़े।
यह मामला स्पष्ट करता है कि शिक्षा संस्थानों में बढ़ती प्रवेश क्षमता के साथ बुनियादी सुविधाओं का विकास भी समान गति से होना आवश्यक है।