गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले सीएम साय ने कहा- पुनर्वास नीति और सरकारी योजनाओं से नक्सल आत्मसमर्पण बढ़े, प्रदेश में दिख रहा सकारात्मक असर।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार रणनीतिक कदम उठा रही हैं। केंद्र सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के प्रदेश दौरे से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहे हैं और बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
सीएम ने इसका श्रेय राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और विकास योजनाओं को दिया। उनके मुताबिक, नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाओं का असर दिख रहा है। लोग अब बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटने लगे हैं।
नक्सली सरेंडर का बढ़ता ग्राफ
प्रदेश सरकार का दावा है कि पिछले एक वर्ष में सैकड़ों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें कई बड़े और कुख्यात नक्सली भी शामिल हैं।
- हाल ही में बस्तर, दंतेवाड़ा और कांकेर जिलों में दर्जनों नक्सलियों ने हथियार डाल दिए।
- पुलिस का कहना है कि अब आम जनता भी नक्सलियों का साथ देने के बजाय सरकार की योजनाओं का समर्थन कर रही है।
- आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास पैकेज, नौकरी और सुरक्षा दी जा रही है।
पुनर्वास नीति का असर
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों को आत्मसमर्पण के बाद बेहतर जीवन की गारंटी दी जाती है। इसमें शामिल हैं:
- नगद प्रोत्साहन राशि।
- सुरक्षित आवास और रोजगार की व्यवस्था।
- बच्चों की पढ़ाई और परिवार की देखभाल।
- समाज में पुनर्वास और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास।
सीएम साय ने कहा कि सरकार का यह प्रयास ही नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में सबसे बड़ा हथियार साबित हो रहा है।
अमित शाह के दौरे से पहले संदेश
गृह मंत्री अमित शाह का आगामी दौरा नक्सल प्रभावित इलाकों के हालात का जायजा लेने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। सीएम के बयान को इस दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार चाहती है कि केंद्र और राज्य मिलकर नक्सल समस्या का स्थायी समाधान निकालें। शाह का दौरा न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाएगा बल्कि नक्सल प्रभावित जिलों को विकास की नई सौगातें भी मिल सकती हैं।
योजनाओं का असर
सरकार का कहना है कि सड़कों के निर्माण, बिजली, स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा जैसी योजनाओं ने नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ा बदलाव लाया है।
- गांवों में अब सड़क और मोबाइल नेटवर्क पहुंचा है।
- रोजगार के अवसर मिलने से युवाओं का झुकाव नक्सलवाद से हटकर सकारात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ रहा है।
- महिला स्व-सहायता समूह और सरकारी योजनाओं से ग्रामीणों की आय बढ़ी है।
विपक्ष का नजरिया
हालांकि विपक्ष का कहना है कि सरकार केवल आंकड़ों और दावों पर काम कर रही है। उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार नक्सलियों के आत्मसमर्पण का वास्तविक डेटा सार्वजनिक करे।
सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका
पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी नक्सली प्रभाव कम करने में अहम रही है। हाल ही में कई बड़े नक्सली ठिकानों पर कार्रवाई की गई है।
- सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए।
- नियमित कैंप और गश्त से नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है।
- आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने माना कि बढ़ते दबाव और योजनाओं की वजह से वे मुख्यधारा में लौटे।
जनता की बदलती सोच
बस्तर और आसपास के इलाकों में अब ग्रामीण खुलकर कह रहे हैं कि वे विकास चाहते हैं, न कि हिंसा। सीएम साय ने कहा कि जनता का यह रुख ही सबसे बड़ी सफलता है।
आगे की चुनौती
हालांकि, नक्सलवाद पूरी तरह खत्म होने में अभी समय लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पूरी तरह हर गांव तक नहीं पहुंचते, तब तक चुनौती बनी रहेगी।
निष्कर्ष जैसा प्रभाव (बिना लिखे)
सीएम साय का यह बयान स्पष्ट करता है कि छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या अब धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। सरकार और केंद्र के संयुक्त प्रयास आने वाले समय में निर्णायक साबित हो सकते हैं।










