मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गुरु घासीदास बाबा के सत्य और समानता के आदर्शों पर चलकर ही विकसित और समरस छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है।
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का विकास तभी संभव है जब समाज गुरु घासीदास बाबा के सतनाम, सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को जीवन में अपनाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुरु बाबा के दिखाए मार्ग पर चलते हुए न्याय, समानता और सामाजिक सद्भाव की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय रविवार को रायपुर में आयोजित गुरु घासीदास जयंती समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बाबा घासीदास के आदर्श आज भी समाज को एकता, करुणा और सच्चाई का मार्ग दिखाते हैं, और इन्हीं आदर्शों से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।

गुरु घासीदास बाबा के आदर्शों की प्रासंगिकता
मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु घासीदास ने उस दौर में सामाजिक भेदभाव, अंधविश्वास और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, जब समाज वर्गों में बंटा हुआ था।
उन्होंने “सतनाम” का संदेश देकर लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

साय ने कहा —
“बाबा घासीदास केवल छत्तीसगढ़ के नहीं, बल्कि पूरे भारत के सामाजिक सुधार आंदोलन के अग्रदूत थे। आज जब हम समानता और न्याय की बात करते हैं, तो उनके विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।”
सामाजिक एकता और समानता का प्रतीक
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु बाबा का संदेश सभी धर्मों, जातियों और वर्गों को जोड़ने वाला है।
- उन्होंने सत्य को ईश्वर और मानव सेवा को धर्म बताया।
- उनका दर्शन यह सिखाता है कि जब तक समाज में समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक सच्चा विकास संभव नहीं।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गुरु बाबा के आदर्शों को नीति और शासन में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री का विज़न — “सतनाम के मार्ग पर विकसित छत्तीसगढ़”
साय ने कहा कि राज्य सरकार गुरु बाबा के सिद्धांतों को आधार बनाकर
- गरीबी उन्मूलन,
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार,
- सामाजिक न्याय,
- और समान अवसरों पर केंद्रित योजनाएं चला रही है।
उन्होंने कहा, “हम छत्तीसगढ़ को ऐसा राज्य बनाना चाहते हैं, जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिले, जहाँ किसी के साथ भेदभाव न हो।”
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर और सतनामी समाज की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं।
गुरु घासीदास के जीवन से प्रेरणा
गुरु घासीदास बाबा ने 18वीं सदी में छत्तीसगढ़ की धरती पर जन्म लेकर सत्य, समानता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना की, जिसका मूल सिद्धांत है —
“सत्य ही ईश्वर है।”
उन्होंने जातिवाद, ऊंच-नीच और पाखंड के खिलाफ संघर्ष किया और समाज में नैतिकता, सादगी और आत्मसम्मान की भावना जगाई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा,
“गुरु बाबा ने हमें सिखाया कि सच्चा धर्म वह है जो मानवता की सेवा करे। राज्य सरकार इन्हीं सिद्धांतों पर काम कर रही है।”
समारोह में जनभागीदारी
रायपुर के इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालु, समाज प्रतिनिधि और छात्र शामिल हुए।
समारोह में गुरु घासीदास जयंती शोभायात्रा, सतनामी भजन, और लोक नृत्य प्रस्तुतियां हुईं।
मुख्यमंत्री साय ने गुरु बाबा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कहा कि समाज के हर वर्ग को उनके संदेश को आत्मसात करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गुरु बाबा के जन्मस्थल गिरौदपुरी धाम के विकास को शीर्ष प्राथमिकता दे रही है।
राज्य सरकार ने वहां पर्यटन, सड़क, बिजली और तीर्थ सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष बजट की घोषणा की है।
गिरौदपुरी धाम को विश्व स्तर पर पहचान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गिरौदपुरी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और समानता का प्रतीक है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में गिरौदपुरी धाम को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने बताया कि तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए
- आवासीय परिसर,
- सतनाम संग्रहालय,
- और सांस्कृतिक अकादमी की स्थापना की जा रही है।
मुख्यमंत्री की अपील
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज से आह्वान किया कि वे सत्य, करुणा और नैतिकता के मार्ग पर चलकर छत्तीसगढ़ को एक आदर्श राज्य बनाएं।
उन्होंने कहा —
“गुरु बाबा ने जो समाज की एकता और समरसता की नींव रखी थी, हमें उसी पर ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का निर्माण करना है।”
समाज के लोगों ने जताया आभार
सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय का धन्यवाद किया और कहा कि राज्य सरकार के नेतृत्व में गुरु बाबा के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य तेज़ी से हो रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं से समाज को नई दिशा और पहचान मिली है।
सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का संकल्प
मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को संरक्षित करने के लिए समर्पित है।
उन्होंने कहा कि गुरु बाबा के जीवन से प्रेरित होकर राज्य में नैतिक शिक्षा, सामाजिक सुधार, और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा दिया जाएगा।
एकता, नैतिकता और विकास का संदेश
कार्यक्रम का समापन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु बाबा का दर्शन हर युग में प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, “यदि हम उनके सिद्धांतों को जीवन में उतार लें, तो छत्तीसगढ़ निश्चित रूप से विकसित और समरस राज्य बन जाएगा।”




