बीजापुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पामेड़ ब्लॉक स्थित अति-दुर्गम गांव गुंडम और कोंडापल्ली में हाल ही में एक ऐतिहासिक घटना दर्ज हुई, जब जिला कलेक्टर श्री अविनाश कुमार पहली बार इन गांवों तक पहुंचे। विकास और प्रशासन की मुख्यधारा से कटे इन गांवों तक पहुंचने के लिए कलेक्टर को 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ी, जिसमें उन्हें घने जंगल और नदियों को पार करना पड़ा। यह दौरा इन दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए सरकार की उपस्थिति और विकास की नई उम्मीद लेकर आया है।
दुर्गम रास्ते और ऐतिहासिक पहल
कलेक्टर श्री अविनाश कुमार का यह दौरा 15 जून को शुरू हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य गुंडम और कोंडापल्ली जैसे उन गांवों तक पहुंच बनाना था, जहां आजादी के बाद से अब तक कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा था। ये गांव बीजापुर जिले के सबसे सुदूर और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक हैं, जहां सड़क संपर्क न के बराबर है और अक्सर आवागमन के लिए जंगल के पगडंडी रास्तों और मौसमी नदियों पर निर्भर रहना पड़ता है। अपनी टीम के साथ कलेक्टर ने 8 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पैदल तय किया। इस यात्रा में उन्हें जंगली रास्तों से गुजरना पड़ा और कई छोटी नदियों व नालों को पार करना पड़ा। यह पहल न केवल प्रशासनिक प्रतिबद्धता दर्शाती है, बल्कि उन क्षेत्रों में भी सरकार की पहुंच सुनिश्चित करने का एक मजबूत संदेश देती है, जहां विकास की किरण अभी तक नहीं पहुंची है।
ग्रामीणों से संवाद और उनकी उम्मीदें
इन गांवों में पहुंचने पर कलेक्टर और उनकी टीम का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। ग्रामीण, जो दशकों से प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का सामना कर रहे थे, पहली बार किसी उच्च अधिकारी को अपने बीच पाकर भावुक हो उठे। कलेक्टर श्री कुमार ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। ग्रामीणों ने मुख्य रूप से पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएँ, शिक्षा, सड़क संपर्क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव की शिकायत की। बच्चों ने स्कूल और शिक्षकों की कमी बताई, जबकि बुजुर्गों ने पेंशन और राशन वितरण में आने वाली समस्याओं से अवगत कराया। कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जाएगा। इस संवाद ने ग्रामीणों में सरकार के प्रति विश्वास और भविष्य के लिए नई उम्मीद जगाई है।
विकास की योजनाएँ और भविष्य की राह
कलेक्टर श्री अविनाश कुमार ने मौके पर ही कई समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल के लिए हैंडपंप लगाने, स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की बात कही। कलेक्टर ने यह भी घोषणा की कि इन गांवों को जल्द ही ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के तहत सड़क संपर्क से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आवागमन सुगम हो सके और विकास की गति तेज हो। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों को मनरेगा, वन अधिकार अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। यह दौरा केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि इन गांवों को विकास की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक ठोस कदम था। प्रशासन ने अगले कुछ महीनों में इन गांवों में विभिन्न विकास कार्यों को शुरू करने की रूपरेखा तैयार की है।
चुनौतियों के बावजूद प्रतिबद्धता
बीजापुर जिले का यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने के कारण भी जाना जाता है, जिससे विकास कार्य और प्रशासनिक पहुंच और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में कलेक्टर का यह दौरा न केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी शांति और विकास लाने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री कुमार ने कहा कि भले ही रास्ते दुर्गम हों और चुनौतियां अनेक हों, लेकिन हर नागरिक तक सरकार की पहुंच सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। यह दौरा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा कि वे अपने कार्यक्षेत्र के सबसे दूरस्थ कोनों तक पहुंचें और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाएं। यह पहल एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां सरकार और जनता के बीच की दूरियां कम हो रही हैं और समावेशी विकास की परिकल्पना साकार हो रही है।




