LIVE शुक्रवार, 8 मई 2026
Advertisement Vastu Guruji
देश

नए सिरे से सर्वे की मांग, लिंगायत महासभा ने खारिज की रिपोर्ट, कर्नाटक की जाति जनगणना पर बवाल

बेंगलुरु
कर्नाटक सरकार जातिगत जनगणना रिपोर्ट के लीक होने के बाद बढ़ते आंतरिक दबाव का सामना कर रही है। खासतौर पर वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के विधायकों और नेताओं ने रिपोर्ट के आंकड़ों पर कड़ा विरोध जताया है। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक से पहले डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने वोक्कालिगा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस विधायकों की एक विशेष बैठक मंगलवार शाम 6 बजे बुलाई है। शिवकुमार ने सोमवार को कहा, "मैंने पूरी रिपोर्ट अभी नहीं देखी है, उसका अध्ययन किया जा रहा है। मंगलवार को हमारी पार्टी के समुदाय विशेष के विधायकों के साथ बैठक होगी। हम इस विषय पर चर्चा करेंगे और ऐसा सुझाव देंगे जिससे किसी की भावनाएं आहत न हों और सभी का सम्मान बना रहे।"

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लिंगायत समुदाय से आने वाले वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने कहा कि वह विभिन्न समुदायों के नेताओं की राय एकत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं भी रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा हूं और कैबिनेट बैठक की तैयारी कर रहा हूं। समुदायों के नेताओं और व्यक्तियों की राय को समाहित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।” मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है और सिर्फ इतना कहा है कि इस पर विशेष कैबिनेट बैठक होगी।

बता दें कि जातिगत जनगणना रिपोर्ट 10 अप्रैल को कैबिनेट को सौंपी गई थी, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है। लीक हुई रिपोर्ट के मुताबिक, वोक्कालिगा समुदाय की आबादी 61.6 लाख (राज्य की कुल जनसंख्या का 10.3%) है और उनके लिए 7% आरक्षण की सिफारिश की गई है। लिंगायत समुदाय की आबादी 66.3 लाख (11%) बताई गई है और 8% आरक्षण प्रस्तावित है। हालांकि, लिंगायतों के भीतर उप-समुदायों जैसे वीरशैव (10.4 लाख), पंचमसाली (10.7 लाख) आदि के बीच विभाजन के कारण प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट में मुस्लिम आबादी 75.2 लाख (12.6%) बताई गई है और उनके लिए आरक्षण को 4% से बढ़ाकर 8% करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह संख्या वोक्कालिगा समुदाय से अधिक है, जिन्हें अब तक राज्य में दूसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता रहा है। वोक्कालिगा समुदाय के संतों और नेताओं ने खुलकर रिपोर्ट का विरोध किया है। वहीं, ऑल इंडिया वीरशैव लिंगायत महासभा ने सोमवार को रिपोर्ट को खारिज कर दिया और एक नई जनगणना कराने की मांग की। महासभा के अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी शंकर बिदारी ने दावा किया कि लिंगायत समुदाय की जनसंख्या करीब 35% है, क्योंकि राज्य के 31 में से लगभग 15 जिलों में लिंगायतों की संख्या 10 लाख से अधिक है। सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना, जो अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से हैं, ने धार्मिक संगठनों की आलोचना पर सवाल उठाते हुए कहा, “ये स्वामीजी और संगठन आंकड़े कहां से लाते हैं?”

गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में सिर्फ जातिगत जनगणना रिपोर्ट पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा, “मंत्रियों से कहा गया है कि केवल इस विषय पर ही चर्चा करें। अभी तो यह शुरुआत है, उसके बाद ही स्वीकृति व अन्य मुद्दे सामने आएंगे।” आलोचना पर उन्होंने कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा। अलग-अलग राय आएंगी, चलिए इस पर बातचीत करते हैं। ये टिप्पणियां समुदायों और नेताओं की ओर से आ रही हैं।”

भाजपा से निष्कासित विधायक और विजयपुरा से विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा है, तो उन्हें अल्पसंख्यक दर्जा क्यों दिया जाए? उन्होंने कहा, “अगर इस रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है, तो ब्राह्मणों को भी, जो कि केवल 2% हैं, अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा मिलना चाहिए।” यतनाल ने आरोप लगाया कि लिंगायतों की संख्या को जानबूझकर उप-समुदायों में बांटकर कम कर दिखाया गया है। अब सभी की नजरें गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस रिपोर्ट को लेकर सरकार का अगला कदम तय होगा।

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.