तमिलनाडु और केरल, दोनों दक्षिण भारतीय राज्यों में आज महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। तमिलनाडु में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को आज विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करना है, जबकि केरल में कांग्रेस पार्टी एक सप्ताह से अधिक की चर्चा के बाद आज अपने नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। दोनों राज्यों में ये घटनाक्रम न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
तमिलनाडु में अग्निपरीक्षा: विजय का फ्लोर टेस्ट
तमिलनाडु में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के लिए आज का दिन बेहद अहम है। उन्होंने रविवार, 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और अब उन्हें विधानसभा में विश्वास मत के जरिए अपनी सरकार का बहुमत साबित करना है। विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम के साथ छोटे दलों के समर्थन से सरकार बनाई है, जिससे बहुमत का आंकड़ा मुश्किल से पार हुआ है। यह फ्लोर टेस्ट ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी, एआईएडीएमके, आंतरिक कलह से जूझ रही है।
एआईएडीएमके में दरार और दलबदल का खतरा
सी. जोसेफ विजय के फ्लोर टेस्ट में एआईएडीएमके की आंतरिक फूट स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकती है। पार्टी का एक गुट विजय के समर्थन में आने का फैसला कर चुका है, उनका दावा है कि उनके पास पार्टी के अधिकांश विधायकों का समर्थन है। सी. वी. शनमुगम और एस. पी. वेलुमणि जैसे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व वाले इस विद्रोही गुट का दावा है कि उनके पास एआईएडीएमके के 47 विधायकों में से लगभग 30 विधायकों का समर्थन है। हालांकि, एआईएडीएमके के राज्यसभा सांसद आई. एस. इनबादुराई ने मंगलवार को स्पष्ट चेतावनी दी कि पार्टी व्हिप के खिलाफ जाने वाले किसी भी विधायक को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह स्थिति फ्लोर टेस्ट को और भी नाटकीय बना सकती है, क्योंकि हर वोट महत्वपूर्ण होगा और दलबदल विरोधी कानून की तलवार विधायकों पर लटकी रहेगी।
केरल में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस खत्म होने की उम्मीद
केरल में विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के एक सप्ताह से अधिक समय बाद आखिरकार आज नए मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस खत्म होने की उम्मीद है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए गहन विचार-विमर्श के बाद आज नाम की घोषणा करने का संकेत दिया है। पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबी चर्चाएं और बैठकें हुई हैं। कल दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी, जिनमें पांच पूर्व केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) संयोजक, केपीसीसी अनुशासनात्मक समिति के प्रमुख और तीन केपीसीसी कार्यकारी अध्यक्ष शामिल थे।
दावेदार और कांग्रेस की ‘सफेद धुआँ’ रणनीति
राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में, सात नेताओं ने कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन दिया, जबकि दो नेताओं – के. मुरलीधरन और वी. एम. सुधीरन – ने वी. डी. सतीशन का समर्थन किया। एक नेता तटस्थ रहा। यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर शीर्ष पद को लेकर अभी भी मतभेद मौजूद हैं। हालांकि, पार्टी ने अभी तक नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन केरल कांग्रेस प्रमुख सनी जोसेफ ने मंगलवार को कहा कि ‘जल्द ही सफेद धुआँ निकलने की उम्मीद की जा सकती है’। यह बयान वेटिकन में पोप के चुनाव की प्रक्रिया का संदर्भ देता है, जहाँ नए पोप के चुने जाने पर सफेद धुआँ निकलता है, जो एक शुभ संकेत माना जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस आलाकमान ने अपना मन बना लिया है और घोषणा बस कुछ ही देर में हो सकती है।
राजनीतिक असर और आगे की राह
दोनों राज्यों में ये राजनीतिक घटनाक्रम दक्षिण भारत की राजनीति पर गहरा असर डालेंगे। तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय का फ्लोर टेस्ट उनकी सरकार की स्थिरता और एआईएडीएमके के भविष्य को तय करेगा। एआईएडीएमके की टूट राज्य में एक नए राजनीतिक समीकरण को जन्म दे सकती है। वहीं, केरल में कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री का चयन पार्टी के भीतर की एकता और आगामी चुनावों के लिए उसकी रणनीति को प्रभावित करेगा। पार्टी को न केवल एक सक्षम नेता का चुनाव करना है, बल्कि सभी गुटों को एकजुट भी रखना होगा। इन दोनों घटनाओं से आने वाले दिनों में दक्षिण भारतीय राज्यों में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है।










