लंदन में आयोजित प्रतिष्ठित वर्ल्ड लिकर अवार्ड्स 2026 में भारतीय आयुर्वेदिक परंपराओं और यूरोपीय डिस्टिलेशन का अनूठा संगम, क्राफ्ट स्पिरिट ब्रांड आयुर्वोड ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। मलयाली उद्यमी मिडहुन मोहन की यह अभिनव रचना, जो पोलैंड में निर्मित होती है, ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय विरासत और आयुर्वेद के विज्ञान को गौरवान्वित किया है। इस जीत से पहले, आयुर्वोड ने इसी वर्ष वारसॉ स्पिरिट्स कॉम्पिटिशन में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था, जिसने इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूत किया है।
आयुर्वोड की अनूठी पहचान
आयुर्वोड एक अद्वितीय स्पिरिट है जो अपनी विशिष्ट संरचना के लिए जानी जाती है। यह 40% ABV (अल्कोहल बाई वॉल्यूम) वाली स्पिरिट पोलिश गेहूं वोदका के एक प्रीमियम बेस से तैयार की जाती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें 75 से अधिक पारंपरिक आयुर्वेदिक वनस्पतियों का मिश्रण है, जिनमें प्रमुख रूप से इलायची, हल्दी, दालचीनी और आंवला शामिल हैं। यह मिश्रण भारतीय आयुर्वेद के सदियों पुराने ज्ञान और आधुनिक डिस्टिलेशन तकनीकों का एक अद्भुत उदाहरण है। स्वाद को संतुलित करने और एक विशिष्ट मिठास प्रदान करने के लिए इसमें गुड़ और प्राकृतिक पोलिश वन फलों का भी उपयोग किया जाता है। यह न केवल एक पेय है, बल्कि एक अनुभव है जो भारत और यूरोप के स्वादों को एक साथ लाता है।
निर्माता का दृष्टिकोण और सांस्कृतिक सेतु
आयुर्वोड के निर्माता, मलयाली उद्यमी मिडहुन मोहन, ने इस स्पिरिट को विकसित करने में कई साल लगाए। उन्होंने पोलिश डिस्टिलर मारियुस्ज़ प्लुसिंस्की के साथ मिलकर काम किया ताकि प्राचीन भारतीय व्यंजनों और आधुनिक यूरोपीय तकनीकी उत्कृष्टता के बीच सही संतुलन स्थापित किया जा सके। मोहन के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक व्यावसायिक उद्यम से कहीं बढ़कर, संस्कृतियों के बीच एक सेतु के रूप में काम करना था। उन्होंने कहा कि इस ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे प्रीमियम स्पिरिट्स की कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया था जो वास्तव में भारतीय विरासत और आयुर्वेद के विज्ञान का सम्मान करते हों। यह उनका दृढ़ विश्वास था कि भारतीय वानस्पतिक ज्ञान को उच्च-स्तरीय वैश्विक डिस्टिलेशन प्रथाओं के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया जा सकता है।
वैश्विक मंच पर भारतीय विरासत का सम्मान
मिडहुन मोहन के लिए आयुर्वोड की यह जीत विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह उनका दूसरा बड़ा स्पिरिट ब्रांड है जिसे उन्होंने वैश्विक बाजार में लॉन्च किया है। इससे पहले, उन्होंने भारतीय अरक ‘चारयम’ को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश किया था। मोहन बताते हैं, “एक ही वर्ष में दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मानों के साथ, आयुर्वोड ने प्रीमियम लिकर सेगमेंट में खुद को एक उल्लेखनीय प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित किया है। यह साबित करता है कि पारंपरिक भारतीय वानस्पतिक ज्ञान उच्च-स्तरीय वैश्विक डिस्टिलेशन प्रथाओं के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत हो सकता है।” यह उपलब्धि भारतीय खाद्य और पेय उद्योग के लिए एक मील का पत्थर है, जो वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच आयुर्वेदिक सिद्धांतों और भारतीय स्वादों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। आयुर्वोड की सफलता मिडहुन मोहन के दूरदर्शी दृष्टिकोण और भारतीय विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने की उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
भविष्य की संभावनाएँ
आयुर्वोड की लगातार दो अंतरराष्ट्रीय जीत ने इसे प्रीमियम स्पिरिट बाजार में एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया है। यह सफलता न केवल ब्रांड के लिए बल्कि उन सभी भारतीय उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपनी पारंपरिक विरासत को आधुनिक नवाचारों के साथ जोड़कर वैश्विक बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं। मिडहुन मोहन का यह अभिनव प्रयोग दर्शाता है कि कैसे भारतीय ज्ञान और यूरोपीय तकनीक का मेल असाधारण उत्पाद बना सकता है। भविष्य में, आयुर्वोड से उम्मीद की जा रही है कि यह अपनी अनूठी स्वाद प्रोफाइल और सांस्कृतिक महत्व के कारण और भी व्यापक दर्शकों तक पहुंचेगा, जिससे भारतीय आयुर्वेद और स्पिरिट उद्योग को एक नई वैश्विक पहचान मिलेगी।






