छत्तीसगढ़ में 52 लाख पंजीकृत वाहनों में से केवल 7.45 लाख पर ही हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगी है। अब भी 45 लाख वाहन बिना एचएसआरपी चल रहे हैं।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में वाहनों की सुरक्षा को लेकर सरकार और परिवहन विभाग ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने की योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य वाहन चोरी रोकने, ट्रैफिक प्रबंधन को आसान बनाने और सड़क सुरक्षा को बेहतर करना है। लेकिन 10 महीने बीत जाने के बाद भी इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दे रही है।
प्रदेश में फिलहाल 52 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक केवल 7.45 लाख वाहनों में ही एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाई गई है। यानी कुल लक्ष्य का महज 20 प्रतिशत ही पूरा हो सका है। शेष 45 लाख वाहन अब भी पुरानी नंबर प्लेटों के साथ सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे न सिर्फ सुरक्षा संबंधी खतरे बने हुए हैं बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एचएसआरपी क्या है और क्यों जरूरी?
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) विशेष रूप से एल्यूमिनियम से बनाई जाती है। इसमें एक स्थायी और छेड़छाड़-रोधी नंबर होता है, साथ ही प्लेट पर हॉट-स्टैम्पिंग वाला क्रोमियम आधारित होलोग्राम लगाया जाता है। इसमें लेज़र कोडिंग भी होती है, जिससे किसी भी वाहन की पहचान आसानी से की जा सकती है।
वाहनों में एचएसआरपी लगाने के कई फायदे बताए जाते हैं:
- चोरी हुए वाहनों की पहचान आसानी से हो सकेगी।
- डुप्लीकेट नंबर प्लेट का इस्तेमाल रोका जा सकेगा।
- ट्रैफिक पुलिसिंग और ई-चालान की प्रक्रिया अधिक सटीक होगी।
- दुर्घटनाओं की स्थिति में वाहन की जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी।
धीमी रफ्तार का कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि एचएसआरपी लगाने की प्रक्रिया धीमी होने के कई कारण हैं।
- जागरूकता की कमी – कई वाहन मालिकों को अभी तक इस नियम और प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।
- सुविधाओं की कमी – छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एचएसआरपी फिटिंग सेंटर की संख्या सीमित है।
- ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में परेशानी – स्लॉट बुकिंग और समय मिलने में दिक्कत की वजह से वाहन मालिक प्रक्रिया को टाल रहे हैं।
- जुर्माना अभी तय नहीं – सरकार ने अब तक एचएसआरपी न लगाने पर कड़ी कार्रवाई या जुर्माने की स्पष्ट घोषणा नहीं की है, जिससे लोग लापरवाह बने हुए हैं।
सरकार की तैयारी
परिवहन विभाग का दावा है कि अगले कुछ महीनों में एचएसआरपी फिटिंग की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त फिटिंग सेंटर खोले जाएंगे और ऑनलाइन प्रक्रिया को और आसान बनाया जाएगा। विभाग यह भी कह रहा है कि एक समय सीमा तय की जा सकती है, जिसके बाद बिना एचएसआरपी वाले वाहनों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि यदि प्रतिदिन औसतन 50 हजार वाहनों में प्लेट लगाई जाए, तो अगले एक वर्ष में सभी वाहनों को कवर किया जा सकता है। हालांकि, मौजूदा रफ्तार देखकर यह लक्ष्य मुश्किल नजर आता है।
वाहन मालिकों की राय
रायपुर के वाहन मालिक राजेश साहू का कहना है कि “ऑनलाइन बुकिंग के बाद 20 दिन तक स्लॉट नहीं मिला। जब स्लॉट मिला तब फिटिंग सेंटर पर लंबी लाइन लगी थी।”
वहीं, बिलासपुर की पूजा तिवारी कहती हैं, “सरकार को इसे आसान बनाना चाहिए। अभी सिर्फ बड़े शहरों में सुविधा है, छोटे कस्बों में लोगों को 100-150 किमी दूर जाकर नंबर प्लेट लगवानी पड़ती है।”
सुरक्षा पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना एचएसआरपी वाले वाहनों की वजह से चोरी, अपराध और सड़क हादसों की जांच प्रभावित हो रही है। फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराधी आसानी से पहचान से बच सकते हैं। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने पहले ही सभी राज्यों को एचएसआरपी लागू करने का निर्देश दिया था।
आगे की चुनौती
प्रदेश सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय सीमा में शेष 45 लाख वाहनों पर एचएसआरपी लगाना है। यदि प्रक्रिया में तेजी नहीं आई तो सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा अधूरी ही रहेगी।
निष्कर्ष जैसा प्रभाव (बिना लिखे)
छत्तीसगढ़ में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की रफ्तार फिलहाल बेहद धीमी है। यदि इसे समय पर पूरा नहीं किया गया, तो इसका असर सीधे सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर पड़ेगा।




