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व्यापार

शेयर बाजार में ऐतिहासिक उछाल: सेंसेक्स **1000** अंक चढ़ा, निफ्टी **24,000** पार

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांकों में भारी उछाल दर्ज किया गया। मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी आने और कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक गिरावट से निवेशकों का मनोबल बढ़ा, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,000 से अधिक अंक उछल गया और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। यह उछाल विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन टिप्पणियों के बाद आया, जिनमें उन्होंने ईरान के साथ “बड़े पैमाने पर बातचीत” वाले एक संभावित समझौते की ओर इशारा किया था, जिससे वैश्विक बाजारों में आशावाद का माहौल बन गया।

बाजार में जोरदार उछाल और प्रमुख सूचकांक

सोमवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 1,073.61 अंक, यानी 1.42 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ 76,488.96 पर बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 312.40 अंक, या 1.32 प्रतिशत की छलांग लगाकर 24,031.70 के स्तर पर बंद हुआ। यह बाजार के लिए एक बेहद सकारात्मक दिन रहा, जिसमें व्यापक खरीदारी देखी गई और अधिकांश सेक्टरों में बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला, क्योंकि निवेशक मध्य-पूर्व की स्थिति में सुधार और ऊर्जा बाजारों में स्थिरता की उम्मीद कर रहे थे। इस तेजी ने हाल की कुछ अस्थिरता के बाद निवेशकों का विश्वास बहाल किया और भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को भी दर्शाया।

उछाल के पीछे के कारण: भू-राजनीतिक शांति और कच्चे तेल की कीमतें

शेयर बाजार में इस मजबूत उछाल का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में गिरावट रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सप्ताहांत में दिए गए बयान, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ एक समझौते के “बड़े पैमाने पर बातचीत” होने की बात कही थी, ने बाजार में आशावाद भर दिया। इस बयान से अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित राजनयिक सफलता की उम्मीद बढ़ी, जिससे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के फिर से खुलने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कम होने की संभावना बढ़ गई। इसके परिणामस्वरूप, ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के निशान से नीचे गिरकर लगभग $98 प्रति बैरल पर आ गईं, जो एक ही सत्र में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट थी। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, क्योंकि भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। बाजार विशेषज्ञ पोनमुडी आर ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि “डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशक धारणा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे बाजारों में निकट अवधि में राजनयिक समाधान की संभावना बढ़ी है।” उन्होंने आगे कहा कि “बाजार एक स्थायी शांति समझौते के सफल कार्यान्वयन और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के विश्वसनीय रूप से फिर से खुलने की तलाश में रहेंगे।” इस सकारात्मक माहौल के कारण भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे मजबूत होकर 95.21 पर बंद हुआ।

शीर्ष लाभ कमाने वाले और नुकसान वाले शेयर

सोमवार की तेजी में कई शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी 50 के शीर्ष लाभ कमाने वालों में आयशर मोटर्स 6.20% की बढ़त के साथ 7,414 रुपये पर, अदानी एंटरप्राइजेज 4.88% की बढ़त के साथ 2,850 रुपये पर, और बजाज फाइनेंस 2.77% की बढ़त के साथ 941.90 रुपये पर बंद हुए। अन्य प्रमुख लाभ कमाने वालों में टाटा मोटर्स पीवी (2.73%), एलएंडटी (2.72%), और एचडीएफसी बैंक (2.62%) शामिल थे। सेंसेक्स में भी बजाज फाइनेंस (2.77%), एलएंडटी (2.72%), एचडीएफसी बैंक (2.62%), बजाज फिनसर्व (2.35%), कोटक बैंक (2.27%), आईसीआईसीआई बैंक (2.18%), एसबीआई (2.15%), एक्सिस बैंक (2.01%), और टाइटन कंपनी (1.95%) ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की।

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हालांकि, इस तेजी के बावजूद कुछ शेयरों में गिरावट भी देखी गई। निफ्टी 50 के शीर्ष नुकसान वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर 2.19% की गिरावट के साथ 1,001 रुपये पर, ओएनजीसी 1.75% की गिरावट के साथ 284.95 रुपये पर, और हिंडाल्को 0.87% की गिरावट के साथ 1,100 रुपये पर बंद हुए। सेंसेक्स में, इंफोसिस (-0.52%), टीसीएस (-0.40%), एचयूएल (-0.33%), और सन फार्मा (-0.22%) जैसे कुछ दिग्गज शेयरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

वैश्विक बाजार और आगे की राह

सोमवार को भारतीय बाजार में आई यह तेजी वैश्विक निवेशक भावना में सुधार का सीधा परिणाम है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद ने न केवल कच्चे तेल की कीमतों को नीचे लाया, बल्कि वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता को भी पुनर्जीवित किया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को महंगाई पर नियंत्रण रखने और व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा मिल सकता है। बाजार अब इस संभावित समझौते के सफल कार्यान्वयन और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के सुचारू संचालन पर करीब से नजर रखेगा। यदि भू-राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में यह सकारात्मक गति आगे भी जारी रह सकती है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।