आदिवासी ग्राम पंचायतों में अब ग्रामीणों की राय से तय होगा विकास का रोडमैप। मुख्यमंत्री साय ने कहा — “गांव की आकांक्षा से बनेगा छत्तीसगढ़ का भविष्य।”
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासन की नई सोच के तहत आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायतों में विकास की दिशा अब ग्रामीणों की आकांक्षाओं से तय होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने “जन आकांक्षा आधारित ग्राम विकास योजना” की ऐतिहासिक शुरुआत की है।
इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्य अब स्थानीय जरूरतों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के अनुसार किए जाएंगे।
ग्रामीणों की भागीदारी से तय होगा विकास
राज्य सरकार का मानना है कि वास्तविक विकास तब संभव है जब उसकी योजना जनता के अनुभव और अपेक्षाओं पर आधारित हो।
इसी सोच के साथ अब आदिवासी अंचलों की ग्राम सभाओं में ग्रामीण स्वयं यह तय करेंगे कि उनके गांव के लिए कौन से कार्य सबसे आवश्यक हैं।
- सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण या कृषि —
इन सभी क्षेत्रों में प्राथमिकता तय करने का अधिकार अब ग्रामवासियों को दिया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा —
“गांव का विकास वही दिशा पाएगा, जो वहां के लोगों की जरूरतों और सपनों से जुड़ा हो। यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।”
आदिवासी इलाकों में होगी योजना की शुरुआत
योजना का पहला चरण राज्य के बस्तर, सुकमा, कांकेर, नारायणपुर, कोरबा, जशपुर और सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों में लागू किया जा रहा है।
यहां चयनित ग्राम पंचायतों में जन आकांक्षा शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ ग्रामीण अपनी राय रख सकेंगे।
इन शिविरों में ग्रामीणों से विकास से संबंधित सुझाव, समस्याएं और प्राथमिकताएं लिखित रूप में ली जाएंगी।
इसके बाद विशेषज्ञ और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर एक “ग्राम विकास रोडमैप” तैयार करेंगे।
सरकार का उद्देश्य — “नीति से जनता तक”
इस पहल का लक्ष्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से विकास का स्थायी मॉडल तैयार करना है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार अब “टॉप टू बॉटम” नहीं बल्कि “बॉटम टू टॉप” अप्रोच पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि
- हर ग्राम पंचायत में विकास कार्य स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप हों।
- हर परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी हों।
- और युवाओं को गांव में ही रोजगार व शिक्षा के अवसर मिलें।
पंचायत प्रतिनिधियों की अहम भूमिका
ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, जनपद सदस्य और ग्रामीण प्रतिनिधि इस नई पहल के केंद्र में होंगे।
सरकार ने उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए “ग्राम विकास प्रशिक्षण कार्यशालाएं” शुरू की हैं।
इन कार्यशालाओं में योजना प्रबंधन, बजट उपयोग और जनसंवाद पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
राजनांदगांव जिले की एक सरपंच गीता नेताम ने कहा —
“पहली बार हमें अपने गांव के विकास की दिशा तय करने का अधिकार मिला है। अब काम लोगों की जरूरत के अनुसार होंगे।”
आदिवासी समाज के लिए विकास की नई दिशा
छत्तीसगढ़ की 31% आबादी आदिवासी है।
इन इलाकों में लंबे समय तक विकास योजनाएं पहुंचने में कठिनाई रही है।
लेकिन अब इस पहल से सरकार और जनता के बीच की दूरी कम होगी।
राज्य के जनजातीय विकास विभाग के अनुसार —
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था,
- पारंपरिक कृषि प्रणाली,
- और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस योजना से न केवल भौतिक विकास बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण को भी बल मिलेगा।
उदाहरण: बस्तर में जन आकांक्षा शिविर
बस्तर जिले के तोकापाल ब्लॉक में आयोजित शिविर में ग्रामीणों ने
- सड़क मरम्मत,
- स्कूल भवन निर्माण,
- हैंडपंप सुधार,
- और महिला समूहों के लिए कार्यस्थल निर्माण की मांग रखी।
सभी सुझावों को डिजिटल फॉर्म में दर्ज कर विकास योजना में शामिल किया गया।
यह प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।
युवाओं और महिलाओं की भागीदारी
नई योजना में युवाओं और महिलाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है।
- युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र,
- महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह आधारित उद्यम
स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“गांव की तरक्की तभी संभव है जब गांव की बेटियां और युवा दोनों उसके निर्माण में भाग लें।”
डिजिटल प्लेटफॉर्म से निगरानी
राज्य सरकार ने योजना की निगरानी के लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया है।
इस पोर्टल पर प्रत्येक ग्राम पंचायत की विकास योजना, प्रगति रिपोर्ट और बजट उपयोग की जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकेगी।
यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों की राय
विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल छत्तीसगढ़ को जन भागीदारी आधारित शासन मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
यह “ग्राम स्वराज” के उस विचार को साकार करेगी, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी ने की थी — जहाँ हर गांव अपने विकास का निर्णय स्वयं ले सके।
परिणाम और संभावनाएं
यह पहल न केवल आदिवासी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगी, बल्कि
- गरीबी उन्मूलन,
- रोजगार सृजन,
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार,
जैसे लक्ष्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाएगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक प्रत्येक आदिवासी ग्राम पंचायत के पास अपना विकास रोडमैप हो और उसे स्थानीय संसाधनों के अनुसार लागू किया जाए।
अंतिम प्रभाव
आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायतों में यह नई पहल सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जनता की सोच और उम्मीदों का प्रतिबिंब है।
अब विकास योजनाएं ऊपर से नहीं, बल्कि गांव की आवाज से संचालित होंगी।
यह कदम छत्तीसगढ़ को भागीदारी आधारित शासन का आदर्श मॉडल बनाएगा।




