छत्तीसगढ़ के किसानों ने बारिश में जंगी रैली निकाल एसडीएम कार्यालय पहुंचकर खाद की कमी पर चक्काजाम की चेतावनी दी, 3 दिनों में समाधान मांगा।
रायपुर । छत्तीसगढ़ के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर बारिश के बावजूद जंगी रैली निकाली और सीधे एसडीएम कार्यालय का रुख किया। किसानों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे उनकी फसल और कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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किसानों की मुख्य मांग
किसानों का कहना है कि यदि सरकार 3 दिनों के भीतर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करती है, तो वे चक्काजाम जैसी कठोर कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- समय पर खाद की उपलब्धता: कृषि कार्य में खाद की कमी से फसल प्रभावित हो रही है।
- सस्ती और गुणवत्ता वाली खाद: किसानों ने उच्च गुणवत्ता और उचित कीमत वाली खाद की मांग की।
- सरकारी समर्थन: खाद वितरण में पारदर्शिता और सरकारी तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील।
रैली का दृश्य
बारिश के बावजूद किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए और जंगी रैली निकालते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिन पर उनकी मांगें स्पष्ट रूप से लिखी हुई थीं। किसानों ने कहा कि बारिश में भी उनकी फसल खतरे में है, इसलिए उनका आंदोलन जरूरी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एसडीएम और स्थानीय प्रशासन ने किसानों की समस्या को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने कहा कि खाद की अपर्याप्त आपूर्ति और वितरण में हो रही समस्याओं को जल्द सुलझाने की कोशिश की जाएगी। वहीं किसानों ने प्रशासन से तीन दिनों की समय सीमा तय की है, अन्यथा सड़क और चौराहों पर चक्काजाम करने की चेतावनी दी है।
किसानों की चिंता
किसानों ने बताया कि बारिश और समय पर खाद की कमी से फसल की पैदावार कम हो सकती है, जिससे उनका आर्थिक नुकसान होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सामाजिक और आर्थिक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों का आंदोलन चक्काजाम तक पहुँचता है, तो राज्य के कृषि और परिवहन दोनों क्षेत्रों पर असर पड़ेगा। खाद की कमी सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित करती है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में किसानों की यह रैली और एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कृषि आपूर्ति और सरकारी तंत्र की जवाबदेही किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। तीन दिनों की समयसीमा किसानों की संकल्पशीलता और चेतावनी को दर्शाती है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है।










