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NDA की 150वीं परेड: 355 नए अफसर, सेना प्रमुख ने दिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संदेश

पुणे के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में शनिवार को 150वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 355 कैडेट भारतीय सशस्त्र बलों का हिस्सा बन गए। इस ऐतिहासिक अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘रिव्यूइंग ऑफिसर’ के तौर पर परेड की सलामी ली और अपने संबोधन में देश की सुरक्षा और भविष्य के अधिकारियों को महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उकसावे पर भारत की प्रतिक्रिया का पैमाना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ है, जिसे इन नए अधिकारियों को हर हाल में कायम रखना होगा।

भव्य समारोह और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

NDA के 150वें पासिंग आउट परेड का समारोह अत्यंत भव्य और प्रेरणादायक रहा। कैडेट्स ने अनुशासन और जोश के साथ मार्च पास्ट किया, जो भारतीय सैन्य परंपराओं और प्रशिक्षण की उत्कृष्टता को दर्शाता है। इस दौरान आसमान में भारतीय वायुसेना की शक्ति का प्रदर्शन भी किया गया। फ्लाईपास्ट में Su-30 MKI लड़ाकू विमानों, चेतक हेलिकॉप्टरों, सारंग हेलिकॉप्टर एरोबेटिक्स टीम और आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने हिस्सा लिया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह दृश्य न केवल कैडेट्स के लिए बल्कि उपस्थित सभी लोगों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत था। इस परेड ने नए अधिकारियों को उनके भविष्य के कर्तव्यों के लिए तैयार होने का संकेत दिया, जहाँ उन्हें देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करना होगा। NDA का यह समारोह भारतीय सैन्य शिक्षा प्रणाली की नींव और उसकी उच्च गुणवत्ता का प्रतीक है।

सेना प्रमुख का प्रेरक संबोधन और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संदेश

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सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन में नए अधिकारियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से कहा, “उकसावे पर भारत के रिएक्शन का पैमाना ऑपरेशन सिंदूर है, कैडेट इसे कायम रखें।यह बयान भारत की दृढ़ रक्षा नीति और किसी भी चुनौती का सामना करने की उसकी क्षमता को रेखांकित करता है। उन्होंने कैडेट्स को भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया। जनरल द्विवेदी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वह स्वयं NDA के 65वें कोर्स के पूर्व कैडेट रह चुके हैं, जिससे उनका यह संबोधन और भी प्रेरणादायी बन गया। उन्होंने आधुनिक युद्ध की चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, और उनसे इन चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को निरंतर तैयार रखने का आग्रह किया।

नए अधिकारियों का भारतीय सशस्त्र बलों में प्रवेश

इस पासिंग आउट परेड के साथ 355 कैडेट भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल हो गए। ये युवा अधिकारी अब भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाएंगे। NDA में कठोर प्रशिक्षण और अनुशासन के माध्यम से उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाता है, ताकि वे देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। इन नए अधिकारियों का प्रवेश भारतीय सशस्त्र बलों को नई ऊर्जा और नेतृत्व प्रदान करेगा। उन्हें युद्ध कौशल, रणनीति और नेतृत्व के गुणों में प्रशिक्षित किया गया है, जो उन्हें भविष्य के युद्धक्षेत्र में सफल होने में मदद करेगा। यह क्षण उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ से वे एक सम्मानजनक और चुनौतीपूर्ण करियर की शुरुआत कर रहे हैं।

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भविष्य की चुनौतियाँ और नेतृत्व का महत्व

जनरल द्विवेदी ने अपने भाषण में नए अधिकारियों को आगाह किया कि उन्हें भविष्य में कई जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिनमें साइबर युद्ध, हाइब्रिड खतरे और पारंपरिक संघर्ष शामिल हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए नवीन सोच, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और मजबूत नेतृत्व कौशल आवश्यक हैं। उन्होंने कैडेट्स को नैतिकता, अखंडता और साहस के उच्च मानकों को बनाए रखने की सलाह दी, जो भारतीय सेना के मूल सिद्धांतों में से हैं। NDA से निकले ये अधिकारी न केवल सैनिक होंगे, बल्कि वे राष्ट्र के निर्माता और सुरक्षा के प्रहरी भी होंगे। उनका योगदान भारत को एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।