राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह उत्सव के अवसर पर कैथल सहकारी चीनी मिल परिसर में एक विशेष पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मिल के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार के नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण पहल के तहत लगभग 100 पौधे रोपे गए, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देना और बढ़ते प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास को बढ़ावा देना था। यह कार्यक्रम न केवल मिल की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि समाज में हरियाली और स्वच्छता के महत्व को भी रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह और मिल की भूमिका
राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह, जो प्रतिवर्ष देशभर में सहकारी आंदोलन के सिद्धांतों, मूल्यों और उपलब्धियों को मनाने के लिए आयोजित किया जाता है, इस वर्ष भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह सप्ताह सहकारिता के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसी कड़ी में, कैथल सहकारी चीनी मिल ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए यह अनूठा पौधारोपण अभियान चलाया। चीनी मिलें, जो कृषि-आधारित सहकारिता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी होती हैं। ऐसे में, उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम स्थानीय समुदाय के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। इस कार्यक्रम में मिल के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे यह संदेश गया कि पर्यावरण की रक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। रोपे गए 100 पौधे न केवल मिल परिसर की सुंदरता बढ़ाएंगे, बल्कि भविष्य में स्वच्छ हवा और बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र में भी योगदान देंगे।
प्रबंध निदेशक का संदेश: पेड़ जीवन का आधार और वर्तमान चुनौती
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार ने पेड़-पौधों के असाधारण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “पेड़-पौधे मानव जीवन का आधार हैं।” उन्होंने प्राचीन समय का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वृक्षों की अधिकता के कारण प्राकृतिक संतुलन बना रहता था, ऋतुएं समय पर आती थीं और वातावरण मानव जीवन के अनुकूल रहता था। उन्होंने आगाह किया कि आज परिस्थितियाँ बदल गई हैं। कृष्ण कुमार ने वर्तमान समय की गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि “बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” उन्होंने पेड़ों के बहुआयामी लाभों को विस्तार से समझाया, जिसमें ऑक्सीजन उत्पादन, कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण, तापमान नियंत्रण, जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और समग्र पर्यावरण संतुलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है। उनका यह कथन पर्यावरण के प्रति गहरी समझ और चिंता को दर्शाता है।
स्वच्छ हरित भविष्य की सामूहिक जिम्मेदारी
कृष्ण कुमार ने अपने संबोधन में सभी नागरिकों से सक्रिय रूप से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने अपील की कि वे स्वयं पौधे लगाएं और अपने पड़ोसियों, मित्रों तथा रिश्तेदारों को भी पौधारोपण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि “स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना, उन्हें बड़ा होते देखना और यह सुनिश्चित करना कि वे स्वस्थ रहें, भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रबंध निदेशक ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति इस दिशा में अपनी भूमिका निभाए और नियमित रूप से पौधारोपण कर उनकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से और सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है। यह कार्यक्रम कैथल सहकारी चीनी मिल की दूरदर्शिता और पर्यावरण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो एक स्थायी और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे स्थानीय स्तर के प्रयास ही राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जिससे सभी के लिए एक बेहतर कल का निर्माण संभव हो सकेगा।






