प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के महत्वपूर्ण यूरोप दौरे के तहत स्वीडन का दो दिवसीय सफल दौरा पूरा करने के बाद अब नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच गए हैं। इस दौरे का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जो भारत की वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे पहले उन्होंने नीदरलैंड और स्वीडन के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए और संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।
नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहने वाला है, जिसमें सबसे प्रमुख तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन है। इस शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री के साथ नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। यह मंच भारत को नॉर्डिक देशों के साथ ऊर्जा, पर्यावरण, नवाचार और डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का 43 वर्षों में नॉर्वे का पहला दौरा है, जो इस यात्रा को ऐतिहासिक महत्व देता है। प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के नेतृत्व के साथ अलग से द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस शिखर सम्मेलन का लक्ष्य आपसी विश्वास और समझ को मजबूत करते हुए सतत विकास और नवाचार के लिए नए रास्ते खोलना है।
स्वीडन से रणनीतिक साझेदारी और सम्मान

स्वीडन में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टरसन के साथ व्यापक वार्ता की। इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप भारत और स्वीडन के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ऊपर उठाने पर सहमति बनी, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रमुख मील का पत्थर बताया गया है। चर्चा का मुख्य केंद्र व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्र थे। इस दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जिनमें संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0 और भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता कॉरिडोर का शुभारंभ शामिल है। दोनों नेताओं ने अगले पांच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया। इसके अतिरिक्त, रविवार को प्रधानमंत्री मोदी को भारत-स्वीडन संबंधों में उनके “असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व” के लिए स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का प्रतीक है।
नीदरलैंड के साथ मजबूत होते संबंध
यूरोप दौरे के शुरुआती चरण में, भारत और नीदरलैंड ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के नेतृत्व के साथ हुई बातचीत में कहा कि पिछले दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक बना हुआ है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह भारत का चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक भी है, जिसमें कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 55.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और जन-से-जन संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि भारत नीदरलैंड को अपने सबसे महत्वपूर्ण भागीदारों में से एक मानता है। इन समझौतों से आर्थिक साझेदारी को और गति मिलने की उम्मीद है।
बहुराष्ट्रीय दौरे का व्यापक प्रभाव
यह पांच देशों का दौरा, जिसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात से हुई थी और जिसका समापन इटली में होगा, भारत की “एक्ट वेस्ट” नीति और वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहा है, बल्कि भारत को यूरोप के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक मंच भी प्रदान कर रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विविधता लाने और उन्हें गहरा करने का प्रयास कर रहा है। इस दौरे के माध्यम से भारत अपने आर्थिक हितों को साधने के साथ-साथ अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।










