बस्तर जिले के जगदलपुर केंद्रीय जेल में बीते पाँच दिनों के भीतर दो बंदियों की मौत से हड़कंप मच गया है, जिसने जेल प्रशासन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार तड़के एक महिला बंदी ने अपनी चुन्नी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, वहीं अब नक्सल मामलों में बंद एक पुरुष कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर गहन चिंताएं पैदा कर दी हैं, जिसके बाद प्रशासन इन दोनों मामलों की विस्तृत जाँच में जुट गया है।
पाँच दिन में दूसरी घटना
जगदलपुर केंद्रीय जेल, जो कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का एक महत्वपूर्ण कारागार है, इन दिनों अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है। यह पहली बार नहीं है जब जेल के भीतर ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन इतने कम समय में दो मौतों ने स्थिति की गंभीरता को बढ़ा दिया है। पहली घटना रविवार तड़के सामने आई, जब एक महिला बंदी ने अपनी चुन्नी का उपयोग कर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से जेल प्रशासन सकते में था ही कि महज पाँच दिनों के भीतर एक और मौत ने पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इन लगातार हुई घटनाओं ने न केवल बंदियों की सुरक्षा बल्कि जेल के भीतर मानसिक स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी बहस छेड़ दी है।
नक्सल कैदी की मौत के हालात
दूसरी मौत रमेश कुंजम नामक एक पुरुष बंदी की हुई है, जो नक्सल मामलों में जेल में बंद था। रमेश कुंजम मूल रूप से बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र के लिंगापुर का निवासी था। उसे पिछले साल नवंबर में दंतेवाड़ा जेल से जगदलपुर केंद्रीय जेल में स्थानांतरित किया गया था। जानकारी के अनुसार, 4 तारीख को रमेश जेल परिसर के बाथरूम में गिर गया था, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई थी। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल डिमरापाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान आज सुबह उसकी मौत हो गई। यह घटना जेल के भीतर बंदियों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही को उजागर करती है। किसी कैदी का बाथरूम में गिरकर इतनी गंभीर चोट लगना और फिर इलाज के दौरान मौत हो जाना, कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पाँच दिनों के भीतर दो बंदियों की मौत ने जगदलपुर केंद्रीय जेल की सुरक्षा, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ महिला बंदी द्वारा आत्महत्या करना, जो जेल के भीतर तनाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी की ओर इशारा करता है, वहीं दूसरी तरफ एक कैदी का जेल परिसर में घायल होना और फिर इलाज के दौरान मौत हो जाना, जेल के भीतर की बुनियादी सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया प्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। जेल मैनुअल के अनुसार, बंदियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जानी चाहिए और उन्हें समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलनी चाहिए। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि इन नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। स्थानीय लोग और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी अब जेल प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन की जाँच और आगे की राह
इन दो मौतों के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल प्रशासन हरकत में आ गया है। फिलहाल, प्रशासन इन दोनों मामलों की गहन जाँच में जुटा हुआ है। मौत के कारणों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई लापरवाही या चूक है। जाँच में जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने, घटना के समय मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ करने और मृतक बंदियों के परिजनों के बयान दर्ज करने जैसे कदम शामिल होंगे। इसके साथ ही, जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की निगरानी प्रणाली और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समीक्षा की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि जाँच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह घटना छत्तीसगढ़ के जेलों में बंदियों के मानवाधिकारों और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक गंभीर चुनौती पेश करती है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।




