किष्टाराम में ग्रामीण बैंक शाखा खुलने से 10 हज़ार से अधिक ग्रामीणों को बैंकिंग, ऋण और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलेगा, आत्मनिर्भर सुकमा की दिशा में कदम।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के किष्टाराम क्षेत्र में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। क्षेत्र में पहली बार ग्रामीण बैंक शाखा का शुभारंभ हुआ है, जिससे 10 हज़ार से अधिक ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ग्रामीण सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन नीति अब सुदूर अंचलों तक पहुँच रही है।

वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा कदम
किष्टाराम, जो कभी नक्सल गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब विकास और आत्मनिर्भरता की पहचान बनने की ओर अग्रसर है।
राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के संयुक्त प्रयासों से यहाँ शाखा खोली गई है।
इस बैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं, ऋण, पेंशन, जनधन खाता, किसान क्रेडिट कार्ड और डिजिटल भुगतान सेवाओं से जोड़ना है।
बैंक शाखा का शुभारंभ जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण बैंक के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने बताया — “ग्रामीण सशक्तिकरण का नया अध्याय”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि सुकमा का किष्टाराम लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहा, लेकिन अब यह क्षेत्र विकास के नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है।
उन्होंने कहा —
“बैंक की यह शाखा सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आत्मनिर्भर भविष्य की नींव है।”
साय ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि हर पंचायत को बैंकिंग सुविधा, हर किसान को वित्तीय सहायता, और हर महिला समूह को उद्यमिता अवसर मिले।
ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत
किष्टाराम और आसपास के गांवों के लोगों को पहले बैंकिंग सेवाओं के लिए 40-50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। अब उन्हें
- नकद निकासी, जमा, पासबुक अपडेट,
- सरकारी योजनाओं का भुगतान,
- और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी।
ग्रामवासी मधु कुरसे, जो स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं, ने कहा —
“पहले हमें पास के बैंक जाने में पूरा दिन लग जाता था। अब गांव में ही सुविधा मिलने से समय और पैसा दोनों बचेंगे।”
महिला समूहों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार की योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) को भी इस शाखा से ऋण और सहायता योजनाएं प्रदान की जाएंगी।
इससे ग्रामीण महिलाएं कृषि, हस्तशिल्प, पशुपालन और लघु उद्योगों में निवेश कर सकेंगी।
जिला प्रशासन के अनुसार, अब तक 200 से अधिक SHG समूहों ने इस शाखा से जुड़ने के लिए आवेदन किया है।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम है।
सुरक्षा और विकास साथ-साथ
सुकमा का किष्टाराम क्षेत्र पहले नक्सल गतिविधियों का केंद्र माना जाता था।
लेकिन बीते कुछ वर्षों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ अब बैंकिंग सेवाओं का विस्तार दिखाता है कि सरकार की “विकास ही सुरक्षा” नीति सफल हो रही है।
स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से यह बैंक शाखा सुरक्षित वातावरण में काम करेगी।
बैंक परिसर में सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड और तकनीकी निगरानी की व्यवस्था की गई है।
डिजिटल इंडिया मिशन से जुड़ाव
बैंक में आधार आधारित लेनदेन, UPI सुविधा, और मोबाइल बैंकिंग सेवा भी उपलब्ध होगी।
इससे ग्रामीण अब डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़ सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।
बैंक अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक चरण में
- जनधन खाता खोलने,
- किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने,
- और सरकारी योजनाओं के लाभ हस्तांतरण (DBT) की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
10 हज़ार से अधिक ग्रामीण होंगे लाभान्वित
किष्टाराम, बुर्कापाल, पुसवाल, और मुरकुंड जैसे गांवों के करीब 10,000 से अधिक लोग इस शाखा से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
बैंक शाखा की स्थापना से कृषि, व्यापार, और लघु उद्योगों को नई दिशा मिलेगी।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री जनधन योजना, पेंशन योजना, मुद्रा योजना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ अब सीधे खाते में मिलेगा।
प्रशासन की पहल
सुकमा जिला प्रशासन ने बताया कि आने वाले महीनों में जिले के अन्य दुर्गम इलाकों में भी बैंकिंग सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार की योजना है कि हर विकासखंड में कम से कम एक ग्रामीण बैंक शाखा स्थापित हो।
सुकमा कलेक्टर ने कहा —
“किष्टाराम में बैंक खुलना केवल वित्तीय सेवा नहीं, बल्कि विश्वास की बहाली का प्रतीक है।”
ग्रामीणों में खुशी की लहर
शाखा के उद्घाटन के बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से अपनी खुशी व्यक्त की।
स्थानीय युवाओं ने कहा कि बैंक से जुड़ने से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बैंक मैनेजर राजेश सिंह ने बताया कि पहले दिन ही 150 से अधिक खाते खोले गए और कई ग्रामीणों ने डिजिटल पेमेंट प्रशिक्षण लिया।
सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आने वाले समय में सुकमा और बस्तर के सभी दुर्गम गांवों तक वित्तीय सेवाएं, सड़क संपर्क, और शैक्षणिक सुविधाएं पहुँचाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के हर मोर्चे पर नक्सल प्रभावित इलाकों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए काम कर रही है।
निष्कर्ष : आत्मनिर्भर सुकमा की ओर कदम
किष्टाराम में ग्रामीण बैंक की शुरुआत सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि विकास, आत्मनिर्भरता और विश्वास की नई शुरुआत है।
सरकार और प्रशासन के इस संयुक्त प्रयास से सुकमा अब अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है।






