भारत के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा जारी नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) बुलेटिन के अनुसार, तेलंगाना ने शिशु मृत्यु दर (IMR) के मामले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य में वर्ष 2024 में शिशु मृत्यु दर 17 दर्ज की गई है, जो प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु की संख्या को दर्शाता है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 24 से काफी बेहतर है, जिससे तेलंगाना में नवजात शिशुओं के पहले वर्ष तक जीवित रहने की संभावनाएँ अधिक मजबूत हुई हैं। यह सुधार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और शिशु देखभाल में निरंतर प्रगति का प्रमाण है।
तेलंगाना में शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी
नवीनतम एसआरएस बुलेटिन के आँकड़े दर्शाते हैं कि तेलंगाना ने शिशु मृत्यु दर को कम करने में एक उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। यह दर किसी क्षेत्र की समग्र स्वास्थ्य स्थिति के सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक मानी जाती है, क्योंकि यह एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु दर को मापती है। तेलंगाना की 17 की IMR दर, जो राष्ट्रीय औसत 24 से काफी कम है, राज्य द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए निवेश और प्रयासों का सीधा परिणाम है। यह प्रदर्शन न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम करता है, बल्कि राज्य के नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणामों का भी प्रतीक है।
2014 में राज्य के गठन के बाद से, तेलंगाना ने लगातार राष्ट्रीय औसत से कम शिशु मृत्यु दर दर्ज करने की प्रवृत्ति बनाए रखी है। यह एक दशक से चला आ रहा सकारात्मक रुझान है जो बताता है कि राज्य ने अपने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है। यह निरंतर सुधार राज्य सरकार की स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं और कार्यक्रमों की सफलता को उजागर करता है, जिससे बच्चों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण मदद मिली है।
एक दशक में बड़ी छलांग: 2014 से 2024 तक का सफर
तेलंगाना ने पिछले एक दशक में शिशु मृत्यु दर को कम करने में एक प्रभावशाली छलांग लगाई है। वर्ष 2014 में, जब राज्य का गठन हुआ था, तेलंगाना की शिशु मृत्यु दर 35 थी, जबकि उस समय भारत का राष्ट्रीय औसत 39 था। दस साल बाद, भारत की शिशु मृत्यु दर घटकर 24 हो गई है, लेकिन तेलंगाना ने इसे और भी अधिक घटाकर 17 तक पहुँचा दिया है। यह लगभग आधी कमी राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की दक्षता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह गिरावट केवल एक संख्यात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि हजारों शिशुओं के जीवन को बचाने की कहानी है। यह दर्शाता है कि कैसे लक्षित नीतियाँ, बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण कार्यक्रम और पोषण संबंधी पहलें मिलकर बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। तेलंगाना ने इस अवधि में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार किया है, जिससे यह महत्वपूर्ण कमी संभव हो पाई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अंतर
हालांकि तेलंगाना ने समग्र IMR में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, लेकिन राज्य के भीतर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर में अभी भी कुछ अंतर बना हुआ है। एसआरएस डेटा के अनुसार, जहाँ राज्य का समग्र IMR 17 है, वहीं ग्रामीण तेलंगाना में यह दर 19 दर्ज की गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 14 है। यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएँ और पहुँच ग्रामीण इलाकों की तुलना में थोड़ी बेहतर हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी यह ग्रामीण-शहरी अंतर मौजूद है, बल्कि यह और भी व्यापक है। ग्रामीण भारत में शिशु मृत्यु दर 27 है, जबकि शहरी भारत में यह 17 है। यह तुलना तेलंगाना के लिए एक सकारात्मक संकेत देती है कि भले ही ग्रामीण-शहरी अंतर मौजूद हो, यह राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों की IMR (19) राष्ट्रीय शहरी IMR (17) के करीब है, जो राज्य के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। यह अंतर कम करने के लिए अभी भी प्रयासों की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा आँकड़े राज्य के प्रयासों की सराहना करते हैं।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का परिणाम और आगे की चुनौतियाँ
तेलंगाना की शिशु मृत्यु दर में लगातार गिरावट राज्य की मजबूत स्वास्थ्य नीतियों और कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष परिणाम है। राज्य ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, नवजात शिशु देखभाल इकाइयों को मजबूत करने और टीकाकरण कवरेज बढ़ाने जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों ने न केवल शिशुओं के जीवन को बचाया है, बल्कि माताओं के स्वास्थ्य में भी सुधार किया है।
भविष्य में, तेलंगाना के सामने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने और सभी भौगोलिक क्षेत्रों में समान स्वास्थ्य परिणामों को सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण-शहरी अंतर को और कम करने और IMR को एकल अंकों तक लाने के लिए निरंतर निवेश, जागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। हालांकि, वर्तमान आँकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि तेलंगाना ने शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है और यह देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत करता है। राज्य का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि सही नीतिगत हस्तक्षेप और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य में बड़े सुधार संभव हैं।










