छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी भुगतान सीधे किसानों के आधार-लिंक बैंक खातों में ट्रांसफर करने का फैसला किया है। इससे देरी और बिचौलियों की समस्या खत्म होगी।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 से धान खरीदी की राशि सीधे किसानों के आधार-लिंक बैंक खातों में ट्रांसफर करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत किसानों को अब न तो समितियों के चक्कर लगाने होंगे और न ही भुगतान में किसी प्रकार की देरी होगी।
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सरकार ने इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में फिलहाल तीन जिलों — कोंडागांव, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा मरवाही — में की है। सफल परिणाम मिलने के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
किसानों के लिए राहत की खबर
धान बेचने के बाद भुगतान पाने में अक्सर हफ्तों की देरी और समितियों में बिचौलियों की समस्या सामने आती रही है। किसान कई बार बैंक और सहकारी समितियों के बीच भटकते रहे हैं। लेकिन इस नई व्यवस्था से किसानों के खातों में सीधे राशि पहुंच जाएगी। इससे उनका समय, श्रम और धन तीनों की बचत होगी।
आधार लिंक खातों से बढ़ेगी पारदर्शिता
खरीफ सत्र में धान बेचने वाले किसानों को उनकी पहचान और खातों की वैधता सुनिश्चित करने के लिए आधार-लिंक बैंक खाते जरूरी होंगे। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी खातों और बिचौलियों की समस्या खत्म होगी।
राज्य के खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसानों की आय में पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करेगा। अब तक धान खरीदी राशि वितरण में तकनीकी कारणों, समितियों की प्रक्रियाओं और वित्तीय बाधाओं के चलते देरी होती रही है, लेकिन प्रत्यक्ष ट्रांसफर प्रणाली (Direct Benefit Transfer – DBT) से यह समस्या खत्म हो जाएगी।
किसानों का स्वागत
कोंडागांव जिले के किसान रामलाल नेताम ने कहा, “पहले भुगतान के लिए समितियों और बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब अगर पैसा सीधे खाते में आएगा, तो हमें बड़ी राहत मिलेगी।” इसी तरह गौरेला-पेंड्रा मरवाही के किसान सुरेश ध्रुव ने कहा कि इस कदम से बिचौलियों पर पूरी तरह रोक लगेगी और किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।
सरकार की योजना
राज्य सरकार ने बताया कि आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ के सभी किसानों को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री और खाद्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के आधार और बैंक खातों को समय पर लिंक किया जाए और डेटा को पोर्टल पर अपडेट किया जाए।
तकनीकी सहयोग
इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही सीएससी (Common Service Centres) और पंचायत स्तर पर भी किसान अपना आधार-बैंक खाता सत्यापित करवा सकेंगे।
आईटी विभाग और खाद्य विभाग ने मिलकर एक ऑनलाइन मॉड्यूल तैयार किया है, जिसमें किसानों की फसल बिक्री और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से रहेगा।
बिचौलियों पर लगेगी रोक
किसानों की सबसे बड़ी समस्या समितियों और बिचौलियों द्वारा कमीशन लेने की रही है। सीधे भुगतान की इस नई व्यवस्था से यह समस्या पूरी तरह खत्म होगी। किसान अपने मोबाइल पर भी भुगतान की सूचना (SMS अलर्ट) प्राप्त कर सकेंगे।
राज्यव्यापी विस्तार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद पूरे राज्य में लागू की जाएगी। खाद्य विभाग ने कहा है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 से धीरे-धीरे सभी जिलों को शामिल किया जाएगा।
किसानों के लिए फायदे
- भुगतान में देरी नहीं होगी।
- समितियों और बिचौलियों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
- 100% पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
- किसानों का समय और श्रम बचेगा।
- बैंक खाते में सीधे SMS अलर्ट मिलेगा।
- आधार सत्यापन से फर्जी खातों की समस्या खत्म होगी।
अधिकारियों की जिम्मेदारी
सरकार ने जिला कलेक्टरों और सहकारी विभाग के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसानों के आधार और बैंक खाते सही ढंग से लिंक हों। किसी भी त्रुटि की स्थिति में तुरंत सुधार हो और किसानों को कोई परेशानी न झेलनी पड़े।
भविष्य की दिशा
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम किसानों की आय सुरक्षा और पारदर्शिता के क्षेत्र में एक बड़ा सुधार साबित होगा। आने वाले समय में इसी आधार पर फसल बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं की राशि भी सीधे खातों में दी जा सकती है।
यह पहल न केवल किसानों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ में कृषि सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।










