LIVE शुक्रवार, 8 मई 2026
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मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर प्रारूप को स्वीकृति दी

भोपाल
 पिछले 9 सालों से पदोन्नति का रास्ता देख रहे मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को राज्य सरकार जल्द ही बड़ी राहत देने जा रही है. प्रदेश सरकार पदोन्नति में आरक्षण का नियम जल्द ही लागू करने की तैयारी करने जा रही है. इसके प्रारूप को देखने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ सभी मंत्रियों ने इसमें अपनी सहमति दे दी है.

नए प्रारूप में तय किया गया है कि पहले जिनकी पदोन्नति हो चुकी है, उन्हें न तो रिवर्ट किया जाएगा और न ही रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. पदोन्नति में आरक्षण के लाभ के लिए सबसे पहले एससी के 16 फीसदी और एसटी के 20 फीसदी पद भरे जाएंगे. इसके बाद बाकी वर्गों को इसका फायदा मिलेगा. माना जा रहा है कि जून माह के अंतिम सप्ताह में इस प्रारूप पर कैबिनेट अपनी मुहर लगा देगी.

9 साल से देख रहे पदोन्नति की राह
मध्य प्रदेश में पदोन्नति का मामला पिछले 9 सालों से उलझा हुआ है. इन 9 सालों के दौरान हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर्ड हो गए और बड़ी संख्या में कर्मचारी पदोन्नति का रास्ता देख रहे हैं, लेकिन अब इसका रास्ता खुलने जा रहा है. राज्य सरकार ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है. इस प्रारूप को दो बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी देख चुके हैं. मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में सभी मंत्रियों के साथ इसका प्रजेंटेशन दिया. अब माना जा रहा है कि अगली कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए लाया जा सकता है.

इस तरह मिलेगा पदोन्नति का आरक्षण का लाभ

    प्रारूप में तय किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण का सबसे पहले जनजातीय वर्ग को लाभ दिया जाएगा. इसमें जनजातीय वर्ग के खाली पदों को भरा जाएगा. इसके बाद अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जाएगा. यदि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षिण पद पर कोई पात्र व्यक्ति नहीं मिलता तो दूसरे वर्ग के कर्मचारी को इसका लाभ नहीं दिया जाएगा. यह पद खाली रखे जाएंगे.

    पदोन्नति के लिए जितने भी पद खाली होंगे, उससे दो गुना के साथ 4 अतिरिक्त नाम बुलाए जाएंगे. इस तरह यदि 10 पद खाली हैं तो उसके लिए 20 और 4 अतिरिक्त यानी 24 लोग बुलाए जाएंगे.

    पदोन्नति के लिए हर साल सितंबर से लेकर नवंबर के बीच डीपीसी की जाएगी. इसके अलावा 31 दिसंबर को रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों की पात्रता का निर्धारण किया जाएगा. हर साल 1 जनवरी को रिक्त होने वाले पदों पर पात्र लोगों को प्रमोशन का लाभ मिलता जाएगा.

    पदोन्नति के लिए दो तरह की लिस्ट तैयार होंगी. इसमें क्लास वन अधिकारियों को पदोन्नति का आधार मैरिट कम सीनियेरिटी को बनाया जाएगा. वहीं क्लास 2 के लिए नीचे के पदों के लिए सीनियेरिटी कम मैरिट के आधार पर लिस्ट तैयार की जाएगी. इससे सभी वर्गों को फायदा पहुंचेगा.

प्रक्रिया दो आधारों पर होगी निर्धारित
क्लास-1 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए "मेरिट कम सीनियरिटी" का फार्मूला लागू होगा। क्लास-2 व उससे नीचे के पदों के लिए "सीनियरिटी कम मेरिट" का आधार अपनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह संतुलित व्यवस्था आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के हितों का ध्यान रखेगी। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी की पदावनति (रिवर्ट) नहीं की जाएगी और पूर्व में सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था उस दिन से लागू मानी जाएगी जिस दिन इसका औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होगा।

पात्रता की अंतिम तिथि 31 दिसंबर
सरकार ने निर्णय लिया है कि पदोन्नति की प्रक्रिया हर साल सितंबर से नवंबर के बीच संपन्न होगी। पात्रता का निर्धारण 31 दिसंबर तक किया जाएगा और 1 जनवरी से पद रिक्तियों के अनुसार योग्य अधिकारियों को पदोन्नति दी जाएगी। पदोन्नति की रिक्तियों की संख्या के दोगुना दावेदारों के साथ चार अतिरिक्त अभ्यर्थियों को सूची में शामिल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि 6 पद रिक्त हैं, तो 12 (दोगुना) + 4 अतिरिक्त = कुल 16 लोगों को प्रमोशन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। पिछले कई वर्षों से प्रमोशन पर लगी रोक के कारण लगभग एक लाख कर्मचारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकार अब इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति देने की दिशा में कार्य कर रही है। 

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.