भारतीय निर्यातकों को अमेरिका से मिलने वाली व्यापारिक पूछताछ में हाल के महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लेकिन यह बढ़ती रुचि ठोस ऑर्डर में तब्दील नहीं हो पा रही है। इसकी मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता है, जिसने अमेरिकी खरीदारों को बड़े ऑर्डर देने से रोक रखा है। यह स्थिति विशेष रूप से रसायन, कपड़ा, कालीन और चमड़े के उत्पादों जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है, जबकि 24 जुलाई को अमेरिका के 10% शुल्क की समाप्ति की समय सीमा नजदीक आ रही है।
अमेरिकी व्यापार नीति की अनिश्चितता
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में इंटरनेशनल इकोनॉमिक इमरजेंसी पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों को रद्द कर दिया था, जिसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 10% का सार्वभौमिक शुल्क पेश किया, जो 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। इस घटनाक्रम ने अमेरिकी खरीदारों के बीच भारतीय उत्पादों के लिए पूछताछ बढ़ा दी है, लेकिन वे अभी भी बड़े ऑर्डर देने से हिचक रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “सेक्शन 301 शुल्क लगने की अभी भी अनिश्चितता है। यह एक बड़ी चिंता बनी हुई है।” अमेरिकी व्यापार नीति की अप्रत्याशित प्रकृति और सेक्शन 301 शुल्कों की संभावना खरीदारों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है।
नए शुल्क और आरोपों का जाल
अमेरिका ने भारत सहित 54 देशों से आयात पर अतिरिक्त 12.5% शुल्क का प्रस्ताव किया है। यह आरोप लगाया गया है कि ये देश तीसरे देशों में जबरन श्रम का उपयोग करके उत्पादित वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के सेक्शन 301 के तहत अधिकांश भारतीय उत्पादों पर नए शुल्क का प्रस्ताव भी है, जो जबरन श्रम जांच का हिस्सा है। एक अलग जांच अत्यधिक औद्योगिक क्षमता पर भी चल रही है, जिसकी सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित है। पहले, IEEPA ढांचे के तहत, अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50% शुल्क लगाया था, जिसमें से आधा भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए दंड के रूप में लगाया गया था। यह जटिल और बहुस्तरीय शुल्क प्रस्ताव अमेरिकी खरीदारों के विश्वास को डिगा रहा है।
निर्यातकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस अनिश्चितता के बावजूद, कुछ निर्यातकों ने स्थिति में सुधार के संकेत दिए हैं। टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने कहा, “पिछले महीने की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है और अब उतनी चुनौतीपूर्ण नहीं है। व्यावसायिक गतिविधि धीरे-धीरे बढ़ रही है, और हम पूछताछ में वृद्धि देख रहे हैं।” हालांकि, पुष्ट ऑर्डर अभी भी कम हैं। जयपुर स्थित हाथ से बुने हुए ऊनी कालीन निर्यातक ऑस्कर एक्सपो डिज़ाइन के संस्थापक महावीर प्रताप शर्मा ने कहा, “हालांकि वैश्विक बाजार में उत्साहजनक संकेत हैं, अमेरिकी नीति को लेकर अनिश्चितता एक बड़ी चिंता बनी हुई है। मांग धीरे-धीरे सुधर रही है और, यदि संघर्ष समाप्त होता है और अमेरिकी बाजार में स्थिरता आती है, तो व्यावसायिक संभावनाएं और बेहतर होंगी।” इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि 24 जुलाई की समय सीमा से इंजीनियरिंग निर्यातकों पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि उनके उत्पाद पहले से ही अमेरिकी सेक्शन 232 टैरिफ व्यवस्था के तहत आते हैं। अमेरिका 2025-26 के दौरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा, जिसमें देश को माल का निर्यात साल-दर-साल 0.92% बढ़कर 87.3 बिलियन डॉलर हो गया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। इस पृष्ठभूमि में, अमेरिकी व्यापार नीति में स्पष्टता और स्थिरता की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जब तक अमेरिकी प्रशासन अपनी भविष्य की टैरिफ नीतियों पर एक स्पष्ट रुख नहीं अपनाता, तब तक भारतीय निर्यातकों के लिए पूछताछ को ठोस और बड़े ऑर्डर में बदलना एक चुनौती बनी रहेगी। व्यापारिक समुदाय को उम्मीद है कि आगामी दिनों में इस अनिश्चितता का समाधान होगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।






