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अंतराष्ट्रीय

पंजाब और सिंध प्रांतों की जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था सीधा प्रभाव पड़ा, भारत के ऐक्शन से पाक त्राहिमाम

इस्लामाबाद 
भारत द्वारा अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखने लगा है। पाकिस्तान के दो प्रमुख जलाशय झेलम नदी पर स्थित मंगला डेम और सिंधू नदी पर बना टर्बेला बांध अब पूरी तरह सूखने के करीब पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान की इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) के अनुसार, बुधवार को पाकिस्तान ने अपने सभी प्रमुख जलस्रोतों से जितना पानी प्राप्त किया, उससे 11,180 क्यूसेक अधिक पानी छोड़ना पड़ा। इसका सीधा प्रभाव पंजाब और सिंध प्रांतों की जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा है।

भारत ने जम्मू-कश्मीर में जलाशयों की सफाई और फ्लशिंग प्रक्रिया शुरू की है, जिससे पाकिस्तान की ओर जल प्रवाह और कम हो गया है। भारत ने पाकिस्तान को जल डेटा साझा करना भी बंद कर दिया है, जो संधि के तहत पहले अनिवार्य था। आईआरएस के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में पानी का कुल इनफ्लो 2,41,611 क्यूसेक और कुल आउटफ्लो 2,52,791 क्यूसेक है। यानी कि पाकिस्तान हर दिन 11,180 क्यूसेक अधिक पानी खर्च कर रहा है। पंजाब प्रांत को इस साल 1,14,600 क्यूसेक पानी मिला, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 1,43,600 क्यूसेक था। यानी 20% की कमी देखी गई है। इसी तरह सिंध प्रांत की भी जल आपूर्ति में गिरावट आई है।

IRSA की सलाहकार समिति ने पहले ही 1 मई से 10 जून तक के लिए 21% की पानी की कमी की चेतावनी दी थी। अब जून से सितंबर के अंत तक यह कमी 7% तक रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जल संकट से खरीफ की बुवाई पर भारी असर पड़ेगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्थगित किया गया है और जल प्रवाह या डेटा साझा करने की बाध्यता अब लागू नहीं है।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने यह कड़ा कदम उठाया है। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 9 से अधिक आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इसमें पाकिस्तान में मौजूद 100 से अधिक आतंकी मारे गए।

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Rana Sikander
लेखक / Author

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.