LIVE बुधवार, 20 मई 2026
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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में महिला स्वास्थ्य को मिला नया आयाम, ग्रामीण अंचलों में बढ़ी जागरूकता

छत्तीसगढ़ में महिला स्वास्थ्य को नई दिशा मिली। ग्रामीण अंचलों में जागरूकता बढ़ी, मातृ मृत्यु दर घटी, महिलाएं अब स्वास्थ्य और सशक्तिकरण दोनों में आगे।

रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से अब महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति देखी जा रही है।
राज्य के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।
सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों, स्वास्थ्य शिविरों और जनजागरूकता अभियानों ने महिलाओं को न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचाया है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य-साक्षरता के नए स्तर तक पहुंचाया है।


मुख्यमंत्री साय की प्राथमिकता — “स्वस्थ महिला, सशक्त समाज”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य की स्वास्थ्य नीतियों में महिला स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है।
उन्होंने कहा —

“स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और मजबूत समाज की नींव होती है। हमारा लक्ष्य है कि राज्य की हर बेटी और हर मां को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले।”

सरकार ने महिला स्वास्थ्य मिशन 2025 की रूपरेखा बनाई है, जिसके तहत

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  • मातृ स्वास्थ्य,
  • किशोरी स्वास्थ्य,
  • मासिक धर्म स्वच्छता,
  • कुपोषण निवारण,
  • और प्रसवोत्तर देखभाल
    पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ग्रामीण अंचलों में जागरूकता अभियान

राज्य के सुदूर अंचलों जैसे बस्तर, सुकमा, कोरबा, जशपुर और बलरामपुर में आशा कार्यकर्ताओं और महिला स्वास्थ्य स्वयंसेविकाओं के माध्यम से घर-घर अभियान चलाया जा रहा है।
इन अभियानों के तहत महिलाओं को

  • नियमित स्वास्थ्य जांच,
  • टीकाकरण,
  • स्वच्छता,
  • पोषण आहार,
  • और मानसिक स्वास्थ्य
    से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।

सरकार ने इस पहल को “सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बहन अभियान” नाम दिया है।
इस अभियान ने हजारों महिलाओं के जीवन में बदलाव लाया है।


मातृ मृत्यु दर में गिरावट

स्वास्थ्य विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मातृ मृत्यु दर (MMR) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
पहले जहां ग्रामीण इलाकों में प्रसव संबंधी जटिलताओं से मौतें होती थीं, अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के कारण यह संख्या तेजी से घटी है।

डॉक्टर संगीता बघेल, जिला चिकित्सा अधिकारी, ने बताया —

“अब महिलाएं पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ अस्पतालों में प्रसव करवा रही हैं। जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच दोनों में वृद्धि हुई है।”


किशोरियों के लिए विशेष पहल

किशोरियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘सुपोषण सखी योजना’ शुरू की है।
इस योजना में स्कूलों और आंगनबाड़ियों में किशोरियों को

  • पोषण शिक्षा,
  • मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन,
  • आयरन और कैल्शियम की गोलियां,
  • तथा नियमित स्वास्थ्य जांच
    की सुविधा दी जा रही है।

इस पहल से किशोरियों में एनीमिया की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है।


आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका

राज्य के 1.5 लाख से अधिक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता इस अभियान की रीढ़ हैं।
वे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही हैं, बल्कि महिलाओं को स्वास्थ्य निर्णयों में भागीदारी के लिए भी प्रेरित कर रही हैं।

सुकमा जिले की आशा कार्यकर्ता रेखा मंडावी कहती हैं —

“पहले महिलाएं शर्म या डर के कारण अपनी बीमारी छिपा लेती थीं, अब वे खुद आकर सलाह मांगती हैं। यही सबसे बड़ा बदलाव है।”


मोबाइल मेडिकल यूनिट — गांव-गांव पहुंचता स्वास्थ्य

राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री मोबाइल मेडिकल सेवा” के तहत दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल क्लीनिक शुरू किए हैं।
इन यूनिट्स में डॉक्टर, नर्स और लैब टेक्नीशियन रहते हैं, जो

  • रक्तचाप,
  • शुगर,
  • गर्भावस्था जांच,
  • और सामान्य बीमारियों का उपचार
    स्थल पर ही करते हैं।

स्वास्थ्य के साथ आत्मनिर्भरता भी

महिलाओं को स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
महिला स्व-सहायता समूहों को सैनिटरी नैपकिन निर्माण, पोषण आहार आपूर्ति और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन से जोड़ा गया है।

राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि इन समूहों के माध्यम से न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ा है, बल्कि महिलाओं में स्वास्थ्य चर्चा भी सामान्य विषय बन गई है।


आदिवासी संस्कृति और स्वास्थ्य पर संवाद

सरकार ने स्वास्थ्य अभियानों को स्थानीय भाषा और संस्कृति से जोड़ने की पहल भी की है।
बस्तर, जशपुर और कोरबा जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य संदेश अब गोंडी, हल्बी और कुड़ुख भाषा में दिए जा रहे हैं।
इससे ग्रामीण महिलाएं संदेश को बेहतर समझ पा रही हैं।


विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण महिला स्वास्थ्य में समग्र दृष्टिकोण अपनाया है।
यह न केवल इलाज तक सीमित है बल्कि रोकथाम, शिक्षा और सशक्तिकरण पर भी केंद्रित है।

डॉ. अविनाश पांडे, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, ने कहा —

“छत्तीसगढ़ का मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि जन भागीदारी से स्वास्थ्य क्रांति संभव है।”


भविष्य की दिशा

सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक हर ग्राम पंचायत में

  • महिला स्वास्थ्य क्लब,
  • किशोरी स्वास्थ्य सलाह केंद्र,
  • और पोषण उद्यान
    स्थापित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य महिला स्वास्थ्य में आत्मनिर्भर बनेगा, और हर ग्रामीण महिला को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं घर तक उपलब्ध होंगी।


निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में महिला स्वास्थ्य अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन बन चुका है।
ग्रामीण अंचलों की महिलाएं अब अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक, सजग और सशक्त हैं।
सरकार की यह पहल महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास लेकर आई है।
यही बदलाव विकसित और सशक्त छत्तीसगढ़ की असली तस्वीर है।

Heshma lahre
लेखक / Author

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.