पुलिस की नई लघु फिल्म “साइबर बाल रक्षक” लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने, सतर्क रहने और पुलिस से बिना डर संपर्क करने का संदेश देती है।
गरियाबंद। साइबर अपराधियों के लगातार बदलते हथकंडों के बीच गरियाबंद पुलिस ने आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से “जन चेतना से जन सुरक्षा” अभियान के तहत एक प्रभावशाली लघु फिल्म जारी की है। “साइबर बाल रक्षक” नामक इस फिल्म का उद्देश्य लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों से सावधान करना और समय रहते सतर्क रहने का संदेश देना है।
लघु फिल्म की कहानी एक साधारण महिला से शुरू होती है, जिसे मोबाइल पर एक आकर्षक ऑनलाइन ऑफर मिलता है। लालच में आकर वह पैसे जमा कराने की तैयारी करती है। रास्ते में दो स्कूली बच्चियां उससे बातचीत करती हैं और समझाती हैं कि यदि यह ऑफर वास्तव में सही होता तो केवल उसी को क्यों मिलता। बच्चियां बताती हैं कि हाल ही में गरियाबंद पुलिस ने उनके स्कूल में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया था, जहां उन्हें ऑनलाइन ठगी से बचने के महत्वपूर्ण उपाय बताए गए थे।
बच्चियों की समझाइश के बाद महिला अपनी गलती का एहसास करती है और साइबर ठगों के जाल में फंसने से बच जाती है। फिल्म यह संदेश देती है कि अनजान कॉल, लिंक, निवेश, लॉटरी, बैंक लोन, केवाईसी अपडेट या किसी भी लालच भरे ऑफर पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
फिल्म के अंत में पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर स्वयं छत्तीसगढ़ी भाषा में लोगों से संवाद करते हुए अपील करते हैं कि किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा न करें। यदि साइबर ठगी की कोशिश हो या कोई उसका शिकार बन जाए तो बिना घबराए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी थाने में सूचना दें।
एसपी वेदव्रत सिरमौर ने कहा कि साइबर अपराधी प्रतिदिन नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि पुलिस से डरने की बजाय हर समस्या साझा करें, क्योंकि “गरियाबंद पुलिस आपकी अपनी पुलिस है।” उन्होंने कहा कि जिले में साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण और नशा मुक्ति को लेकर लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उनका संदेश है— “आपकी मुस्कान, गरियाबंद पुलिस की पहचान।”
इस जागरूकता फिल्म की कहानी और निर्देशन फिल्ममेकर हेमंत तिवारी राहुल ने किया है। वे अब तक पुलिस विभाग के लिए 150 से अधिक जागरूकता वीडियो, 100 से ज्यादा छत्तीसगढ़ी गीत तथा दो फीचर फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं। उनका कहना है कि फिल्मों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना और सकारात्मक बदलाव लाना भी है। गरियाबंद पुलिस की यह पहल बताती है कि जागरूकता और समय पर पुलिस को सूचना देना ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।




