जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के सामने हिंदू पक्ष ने कड़ा तर्क दिया कि यह स्मारक कभी मस्जिद था ही नहीं, बल्कि यह राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है। 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी, ''ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट साफ बताती है कि वर्तमान ढांचा मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का दोबारा इस्तेमाल करके बनाया गया है। परिसर में आज भी संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, हवन कुंड, मंडप और हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां मौजूद हैं.