इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य गांव और आसपास के क्षेत्रों में क्षय रोग (टीबी) के उन सभी संभावित मरीजों की पहचान करना है, जिनका अभी तक निदान नहीं हुआ है, ताकि उन्हें समय पर उचित उपचार मिल सके और 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।