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रायबरेली में टीबी मुक्त भारत का संकल्प: संदीनागिन में 100 दिवसीय सघन खोज

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के संदीनागिन गांव में हाल ही में “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत एक महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय सघन टीबी खोज कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य गांव और आसपास के क्षेत्रों में क्षय रोग (टीबी) के उन सभी संभावित मरीजों की पहचान करना है, जिनका अभी तक निदान नहीं हुआ है, ताकि उन्हें समय पर उचित उपचार मिल सके और 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त पहल पर आधारित यह कार्यक्रम समुदाय स्तर पर टीबी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अभियान का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक लक्ष्य 2030 से पाँच साल पहले का है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सघन सामुदायिक स्तर पर टीबी के मामलों की पहचान करना और उनका उपचार सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई मरीज जागरूकता की कमी या सामाजिक कलंक के डर से सामने नहीं आते हैं। रायबरेली में शुरू किया गया यह 100 दिवसीय कार्यक्रम इसी राष्ट्रीय रणनीति का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य न केवल नए मामलों की पहचान करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि टीबी के पुराने मरीज अपना उपचार पूरा करें। टीबी एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। इसका समय पर निदान और उपचार न होने पर यह जानलेवा हो सकता है और दूसरों में भी फैल सकता है।

कार्यक्रम की कार्यप्रणाली

संदीनागिन गांव में चलाए जा रहे इस 100 दिवसीय सघन टीबी खोज कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी। इन टीमों में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें टीबी के लक्षणों की पहचान करने और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह कार्यक्रम केवल गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के छोटे मजरों और बस्तियों को भी कवर करेगा। स्क्रीनिंग के दौरान, यदि किसी व्यक्ति में लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना या रात को पसीना आने जैसे टीबी के लक्षण पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत निःशुल्क जांच के लिए प्रेरित किया जाएगा। इन जांचों में थूक की जांच (sputum test) और आवश्यकतानुसार छाती का एक्स-रे शामिल होगा। जिन व्यक्तियों में टीबी की पुष्टि होगी, उन्हें तत्काल निःशुल्क उपचार प्रदान किया जाएगा और उपचार के दौरान नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा।

स्थानीय प्रशासन और जनता की भूमिका

इस अभियान की सफलता के लिए स्थानीय प्रशासन, विशेषकर जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने इस कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीमें लगातार अभियान की प्रगति की निगरानी कर रही हैं। जनता की भागीदारी इस तरह के जन स्वास्थ्य अभियानों की रीढ़ होती है। संदीनागिन गांव के प्रधान और अन्य स्थानीय नेताओं को भी इस अभियान में शामिल किया गया है ताकि वे ग्रामीणों को जागरूक कर सकें और उन्हें जांच व उपचार के लिए प्रेरित कर सकें। कई जागरूकता शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है, जहाँ टीबी के कारणों, लक्षणों, उपचार और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि टीबी एक लाइलाज बीमारी नहीं है और सही समय पर पूरा इलाज करवाने से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है।

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चुनौतियों और आगे की राह

हालांकि यह कार्यक्रम एक सराहनीय पहल है, लेकिन इसकी सफलता में कुछ चुनौतियाँ भी आ सकती हैं। इनमें सबसे प्रमुख चुनौती टीबी से जुड़ा सामाजिक कलंक है, जिसके कारण लोग अपनी बीमारी उजागर करने से कतराते हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और उपचार के दौरान दवाइयों को बीच में ही छोड़ने की प्रवृत्ति भी एक बड़ी चुनौती है। टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि न केवल 100 दिवसीय कार्यक्रम के दौरान बल्कि उसके बाद भी फॉलो-अप और जागरूकता के प्रयास जारी रहें। भविष्य में, जिला स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि संदीनागिन जैसे सफल मॉडलों को जिले के अन्य हिस्सों में भी दोहराया जाए ताकि रायबरेली को वास्तव में टीबी मुक्त बनाया जा सके। 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार, स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता के संयुक्त और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।

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