गरियाबंद में विश्व आदिवासी दिवस पर जल-जंगल-जमीन, पेसा कानून, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों को लेकर आदिवासी समाज ने एकजुटता दिखाई।
गरियाबंद। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को गरियाबंद में आदिवासी समाज ने जल-जंगल-जमीन, संवैधानिक अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों को लेकर एकजुटता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली विधायक मुकेश सहरावत, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल, बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक राम ध्रुव और जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम से पहले अतिथियों का बाइक रैली, आतिशबाजी और जोरदार नारों के साथ स्वागत किया गया। रैली में आदिवासी समाज के युवा, महिलाएं और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे लोगों ने आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों पर जोर
कार्यक्रम में पेसा कानून, ग्रामसभा की भूमिका, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी और जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय समुदाय के अधिकारों को प्रमुखता से उठाया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी विरासत और सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया गया।
संजय सिंह ने बिरसा मुंडा को भारत रत्न देने की मांग की
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि देश में करीब साढ़े 10 करोड़ आदिवासी हैं और आजादी के बाद से समाज अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को भारत रत्न देने की मांग उठाई।
संजय सिंह ने न्यायपालिका में आदिवासी प्रतिनिधित्व, शिक्षा, रोजगार और सरकारी स्कूलों की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पेपर लीक और प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन से जुड़े फैसलों में ग्रामसभा की भूमिका और सहमति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अमित बघेल ने कहा- जल, जंगल और जमीन बची तो समाज बचेगा
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने कहा कि संविधान लागू हुए 76 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आदिवासी समाज आज भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा आदिवासी समाज के अस्तित्व से जुड़ी है।
बघेल ने समाज से अपने वोट की ताकत समझने और चुनाव के दौरान नेताओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
2028 के चुनाव को लेकर राजनीतिक संदेश
अमित बघेल ने 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि आदिवासी समाज अपनी राजनीतिक ताकत का जवाब देगा। उन्होंने सत्ता और नीति निर्धारण में समाज की निर्णायक भागीदारी की बात कही। हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने पर्यावरण और आदिवासी हितों की सुरक्षा पर भी जोर दिया।
विधायक जनक राम ध्रुव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता जरूरी है। जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान के साथ आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही।



