बिलासपुर में एडीएम एस.एस. दुबे की मौजूदगी में शांति समिति ने गणेश चतुर्थी और ईद-ए-मिलाद को सौहार्द, भाईचारे और ध्वनि नियंत्रण के साथ मनाने का निर्णय लिया।
बिलासपुर। बिलासपुर जिले में 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी और 6 सितंबर को ईद-ए-मिलाद (मिलाद-उन-नबी) को आपसी सौहार्द और भाईचारे की भावना के साथ मनाने का निर्णय जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक में लिया गया। यह बैठक सोमवार को जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित की गई, जिसमें एडीएम एस.एस. दुबे की मौजूदगी रही।
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बैठक का उद्देश्य
शांति समिति की बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आगामी त्योहार सुरक्षा, सामुदायिक सौहार्द और सामाजिक भाईचारे के साथ मनाए जाएँ।
- बैठक में तय किया गया कि सभी सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा और सुव्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
- समिति ने धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में समुदायों के बीच सहयोग और समझ बढ़ाने के उपाय सुझाए।
ध्वनि नियंत्रण और साउंड लिमिटर की आवश्यकता
- समिति ने निर्णय लिया कि सभी ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर) में साउंड लिमिटर लगाना अनिवार्य होगा।
- किसी भी दशा में ध्वनि 70 डेसीबल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- आयोजन समितियों को सांस्कृतिक और मनोरंजक कार्यक्रमों में ध्वनि यंत्रों का उपयोग करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
- यह कदम शांति, सार्वजनिक स्वास्थ्य और वातावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
गणेश चतुर्थी (27 अगस्त)
- गणेश चतुर्थी के अवसर पर सार्वजनिक पूजा स्थलों और घरों में विशेष सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- ध्वनि नियंत्रण के नियमों के पालन के साथ, सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण पूजा आयोजित की जाएगी।
- समिति ने सभी समुदायों से आग्रह किया कि वे उत्सव में सहयोग, सम्मान और सामाजिक सौहार्द का पालन करें।
ईद-ए-मिलाद (6 सितंबर)
- ईद-ए-मिलाद के अवसर पर मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
- आयोजन समितियों को सामुदायिक सहयोग और आपसी समझ के साथ कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
एडीएम एस.एस. दुबे का संदेश
- एडीएम एस.एस. दुबे ने कहा कि त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज में भाईचारे और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का अवसर भी हैं।
- उन्होंने जोर दिया कि सभी नागरिक और आयोजनकर्ता नियमों का पालन करें ताकि सुरक्षा, शांति और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित हो।
- एडीएम ने यह भी कहा कि प्रशासन सभी आयोजनों के दौरान निगरानी और आवश्यक सहायता प्रदान करेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
- नागरिकों और धार्मिक प्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना की।
- उन्होंने कहा कि नियमों के पालन और ध्वनि नियंत्रण से समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- आयोजन समितियों ने आश्वासन दिया कि वे सभी निर्देशों का पालन करेंगे और त्योहारों को शांति और सौहार्द के साथ मनाएंगे।
निष्कर्ष
बिलासपुर जिले में गणेश चतुर्थी और ईद-ए-मिलाद को सौहार्द, भाईचारे और सुरक्षा के साथ मनाने का निर्णय सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- ध्वनि नियंत्रण और अनुमति नियम शांति, स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे।
- इस पहल से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सामुदायिक सहयोग बढ़ेगा और समाज में आपसी भाईचारे को बल मिलेगा।










