LIVE बुधवार, 13 मई 2026
Advertisement Vastu Guruji
देश

देश में जल्द आएंगी गेहूं और जौ की 18 नई पोषक किस्में

ग्वालियर
देश में अगले वर्ष तक किसानों को 18 नई किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें 14 किस्में गेहूं की और चार किस्में जौ की शामिल हैं। इन किस्मों की खास बात यह है कि ये न केवल उच्च उत्पादन क्षमता वाली हैं, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध हैं।

हाल ही में देश में कृषि विज्ञानियों द्वारा अनुसंधान से विकसित की गईं इन किस्मों में जिंक और आयरन की मात्रा 45 पीपीएम और प्रोटीन की मात्रा 13.5 प्रतिशत तक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन किस्मों के अनाज से खासकर कुपोषण से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों में पोषण संबंधी कमी को दूर किया जा सकेगा।
सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजेंगे

जौ की चारों किस्में भी उत्पादन और पोषण के लिहाज से अहम हैं। इनमें डीडब्ल्यूआरबी-223 एक विशेष किस्म है, जो छिलका रहित है। इसे गेहूं में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है, जिससे पोषण में और भी वृद्धि होगी। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी के समापन अवसर बुधवार को इन नई किस्मों को अंतिम परीक्षण और मंजूरी के लिए सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजने की सहमति दी गई।

समापन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. एसके प्रधान ने की, जबकि सह-अध्यक्षता भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने की। डॉ. तिवारी ने जौ की छिलका रहित किस्म को किसानों के लिए उपयोगी बताया। गोष्ठी के समापन सत्र में फसल सुधार, फसल सुरक्षा, गुणवत्ता, मूलभूत और सामाजिक विज्ञान, एवं जौ नेटवर्क की प्रमुख अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
दलहन-तिलहन को मिलेगा बढ़ावा

विज्ञापन
Advertisement

गोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन राज्यों में गेहूं का उत्पादन सीमित है, वहां के किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल पोषण सुरक्षा में वृद्धि होगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।
जल्द ही किसानों को उपलब्ध होंगी ये किस्में

गेहूं की किस्में

    एनआइएडब्ल्यू – 4114 (निफाड)
    डब्ल्यूएच – 1306 (हिसार)
    केबी – 2031 (कानपुर)
    यूपीबी – 1106 (पंतनगर)
    एचडी – 3428 (नई दिल्ली)
    डीबीडब्ल्यू – 386, डीबीडब्ल्यू – 443 (करनाल)
    पीबीडब्ल्यू – 891 (लुधियाना)
    लोक – 79 (सनोसरा)
    एनडब्ल्यूएस – 2222 (नुजिवीडु)
    एकेएडब्ल्यू – 5100 (अकोला)
    जीडब्ल्यू – 543 (विजापुर)

जौ की किस्में

    डीडब्ल्यूआरबी – 219
    डीडब्ल्यूआरबी – 223 (करनाल)

इन राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ

महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के किसानों को इन नई किस्मों से पोषण और उत्पादन दोनों के स्तर पर लाभ मिलेगा।

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.