भारत सरकार ने आज एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में इन कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। इस फैसले का उद्देश्य बढ़ते सोने के आयात पर अंकुश लगाना, रुपये पर दबाव कम करना और कच्चे तेल की ऊंची आयात लागत के बीच देश के चालू खाता घाटे को नियंत्रित करना है। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के अनुसार, इस अचानक वृद्धि के बाद आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों के करीब संरेखित होने की उम्मीद है।
आयात शुल्क में अचानक वृद्धि और तात्कालिक असर
सरकार के इस अचानक फैसले से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तत्काल और तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना क्षण भर के लिए ₹1.64 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया, जबकि चांदी ₹3 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सरकार बढ़ते सोने के आयात से चिंतित है, जो रुपये पर दबाव डाल रहा है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित कर रहा है। आयात शुल्क बढ़ाकर, सरकार का लक्ष्य अत्यधिक बुलियन आयात पर अंकुश लगाना, डॉलर के बहिर्प्रवाह को कम करना और चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव का प्रबंधन करना है। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का संकेत देता है, जो व्यापार संतुलन बनाए रखने और मुद्रा स्थिरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
वैश्विक बाजार और कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक
पिछले सप्ताह वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी ने मजबूत वापसी दर्ज की थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, ट्रेजरी यील्ड में कमी और कमजोर अमेरिकी डॉलर ने वैश्विक बाजारों में इन कीमती धातुओं की खरीद में रुचि को फिर से जगाया। अंतर्राष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड लगभग 2% बढ़कर $4,740 प्रति औंस के करीब पहुंच गया, जो महीनों में इसकी सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त थी, जबकि चांदी लगभग 6% बढ़कर इस सप्ताह $86 प्रति औंस के करीब पहुंच गई। पिछले उछालों के विपरीत, इस बार सोने में यह तेजी घबराहट में सुरक्षित-निवेश की मांग के बजाय मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के आसपास बदलती उम्मीदों से प्रेरित थी। महीनों तक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंची यील्ड के दबाव के बाद सोने के लिए व्यापक मैक्रो तस्वीर में भी थोड़ा सुधार हुआ। अप्रैल में वैश्विक स्तर पर भौतिक रूप से समर्थित गोल्ड ETF में $6.6 बिलियन का प्रवाह दर्ज किया गया, जिससे कुल होल्डिंग 4,137 टन तक पहुंच गई, जो रिकॉर्ड पर तीसरा सबसे ऊंचा स्तर है। केंद्रीय बैंकों की खरीद भी मजबूत बनी हुई है, जो कीमतों को एक ठोस आधार प्रदान कर रही है। इस बीच, चांदी का प्रदर्शन सोने से बेहतर बना रहा, जिसे संरचनात्मक आपूर्ति घाटे और स्वच्छ ऊर्जा व इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी मजबूत औद्योगिक मांग का समर्थन मिला।
मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और भू-राजनीतिक परिदृश्य
बाजार एक बार फिर मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर केंद्रित हैं। अमेरिकी CPI डेटा उम्मीद से अधिक गर्म आया है, हालांकि यह फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक सख्ती को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त गंभीर नहीं था। खाद्य, ऊर्जा और सेवाओं में मुद्रास्फीति का दबाव ऊंचा बना हुआ है, जिससे ट्रेजरी यील्ड और डॉलर अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। बाजार इस सप्ताह होने वाली ट्रम्प-शी बैठक पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि ईरान प्रतिबंधों, व्यापार और प्रौद्योगिकी पर चर्चा व्यापक कमोडिटी भावना और वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ये वैश्विक कारक घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों के लिए एक जटिल पृष्ठभूमि बनाते हैं, जहां आयात शुल्क में वृद्धि ने एक और परत जोड़ दी है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर का अनुमान है कि एक बार जब घरेलू कीमतें संशोधित शुल्क संरचना को पूरी तरह से अवशोषित कर लेंगी, तो MCX की कीमतें अंतरराष्ट्रीय रुझानों के साथ अधिक निकटता से संरेखित होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सोना निकट अवधि के समेकन चरण में बना हुआ है क्योंकि बाजार चिपचिपी मुद्रास्फीति और उच्च यील्ड की उम्मीदों को मजबूत ETF प्रवाह और केंद्रीय बैंक की मांग के मुकाबले संतुलित कर रहे हैं। तकनीकी स्तरों पर, स्पॉट गोल्ड के लिए $4,450 / $4,400 पर समर्थन और $4,850 / $5,000 पर प्रतिरोध देखा जा सकता है। इसी तरह, MCX गोल्ड के लिए ₹1,53,500 / ₹1,52,000 पर समर्थन और ₹1,67,500 / ₹1,72,000 पर प्रतिरोध स्तर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की ऊपर की ओर की गति सीमित रह सकती है, जब तक कि व्यापक आर्थिक या भू-राजनीतिक परिदृश्य में कोई महत्वपूर्ण बदलाव न हो। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार का यह कदम घरेलू मांग, तस्करी और कुल आर्थिक स्थिरता पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव डालता है।










