डीडीयू नगर में पड़ाव से मुगलसराय होते हुए गदना मोड़ तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण और सिक्स लेन निर्माण कार्य ने स्थानीय व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी मुद्दे को लेकर 13 मई, 2026 को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर प्रभावित व्यापारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। व्यापारियों ने स्पष्ट मांग की है कि उनकी पुरानी दुकानें हटाने से पहले उन्हें उचित मुआवजा और व्यवस्थित पुनर्वास की जगह दी जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
व्यापारियों की बढ़ती चिंताएं और मांगें
डीडीयू नगर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के तहत सड़क के दोनों ओर आठ-आठ फीट चौड़े फुटपाथ और ड्रेन निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। यह कार्य क्षेत्र के विकास और सुगम यातायात के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में छोटे-बड़े व्यापारियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है, जिनकी दुकानें सड़क की जद में आ रही हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अधिकारियों ने PWD के एक्सईएन राजेश कुमार से मुलाकात के दौरान मुख्य रूप से दो मांगें रखीं। पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि जिन दुकानदारों की दुकानें इस निर्माण कार्य के चलते टूट रही हैं, उन्हें सरकार द्वारा उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, जो उनके नुकसान की भरपाई कर सके। दूसरी मांग यह है कि विशेष रूप से दक्षिण पटरी के प्रभावित व्यापारियों को किसी व्यवस्थित और उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, जहां वे बिना किसी बाधा के अपना व्यापार फिर से शुरू कर सकें और अपनी रोजी-रोटी कमा सकें।
प्रशासन का रुख और पुनर्वास की कवायद
इस पूरे मामले पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक्सईएन राजेश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य शासन द्वारा निर्धारित मानकों और नियमों के अनुसार ही कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यकतानुसार दुकानों पर निशान लगाए गए हैं और संबंधित दुकानदारों को निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही पूर्व सूचना भी दी गई थी। राजेश कुमार ने यह भी जानकारी दी कि कई व्यापारी स्वयं ही अपनी दुकानें हटा रहे हैं ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा उत्पन्न न हो और परियोजना समय पर पूरी हो सके। वहीं, व्यापारियों की पुनर्वास की मांग के संबंध में, जिलाधिकारी ने नगरपालिका के ईओ और एसडीएम को जमीन चिह्नित कर पुनर्वास के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह कदम दर्शाता है कि प्रशासन व्यापारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और उनके समाधान के लिए एक व्यवहार्य मार्ग खोजने हेतु प्रयासरत है।
विकास और आजीविका का संतुलन
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी चंदेश्वर जायसवाल ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग कभी भी विकास कार्यों के विरोध में नहीं रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डीडीयू नगर में होने वाले इस सड़क चौड़ीकरण से क्षेत्र को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा और यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन जिन लोगों की आजीविका और व्यापार इस परियोजना से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, उनके पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था पहले की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि विकास तभी सार्थक है जब वह किसी को बेघर या बेरोजगार न करे, बल्कि सभी को साथ लेकर चले और सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखे। व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और पुनर्वास तथा मुआवजे के संबंध में जल्द ही कोई ठोस और संतोषजनक समाधान निकालेगा, ताकि विकास और व्यापारियों की आजीविका के बीच एक उचित संतुलन स्थापित किया जा सके और किसी को भी अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।










