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मध्य प्रदेश

सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी

सर्पदंश रोकथाम अभियान
सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी

भोपाल
मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सर्पदंश के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इसे स्थानीय आपदा घोषित किया है। पिछले वर्ष सर्प-दंश से 2,500 से अधिक मौत हुई थी जिससे व्यापक जनहानि हुई थी। बारिश के मौसम में बढ़ने वाली इन घटनाओं की रोकथाम के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें जनजागरूकता, आपातकालीन सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और निवारण संबंधी उपाय शामिल किए गए हैं।

जनजागरूकता और प्रशिक्षण पर विशेष जोर

इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, रेडियो, होर्डिंग्स और प्रिंट मीडिया के जरिए सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रसारित की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को इस खतरे और उससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाएगा।

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आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने की पहल

प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित 'सर्प मित्र' और 'स्नेक-कैचर्स' की तैनाती की जाएगी, जिनके हेल्पलाइन नंबर जनता को उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम (विषनाशक दवा) का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। पीड़ितों को निकटतम चिकित्सा केन्द्र तक पहुँचाने की व्यवस्था को और सुचारू बनाया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके।

निवारक उपायों पर सामुदायिक भागीदारी

जनजागरूकता गतिविधि में ग्रामीणों को खेतों और जंगलों में काम करते समय मोटे जूते और दस्ताने पहनने की सलाह दी जाएगी। घरों के आसपास सफाई रखने, झाड़ियों को काटने और कूड़े के उचित निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुपालकों को पशुशालाओं के आसपास बाड़ लगाने और पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करने की सलाह दी गई है। पर्यटन स्थलों पर सर्प अधिकता क्षेत्रों को चिह्नित करने और चेतावनी बोर्ड लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

बजट आवंटन और जनता से अपील

राज्य सरकार ने इस अभियान के लिए प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये आवंटित किए हैं। बजट का उपयोग प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और जनजागरूकता कार्यक्रमों में किया जाएगा। जनता से अपील की गई है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या देसी उपचार की बजाय तुरंत निकटतम अस्पताल पहुँचें, क्योंकि पहला एक घंटा 'गोल्डन आवर' यानि जीवनरक्षक होता है। साथ ही, सांपों को मारने या परेशान करने के बजाय उन्हें दूर भगाने के उपाय करने पर जोर दिया गया है। इस व्यापक अभियान से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

 

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.