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वक्फ बिल के खिलाफ असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में फाड़ी थी विधेयक की कॉपी, अब किया सुप्रीम कोर्ट का रुख

नई दिल्ली
संसद से पारित हुए वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के खिलाफ एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में विधेयक की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। संसद में भी ओवैसी ने वक्फ बिल का विरोध किया था और प्रतीकात्मक तौर पर इसकी एक कॉपी भी फाड़ दी थी। ओवैसी की याचिका अधिवक्ता लजफीर अहमद ने दायर की है।

विधेयक को राज्यसभा में 128 सदस्यों ने पक्ष में और 95 ने विरोध में पारित किया। इसे 3 अप्रैल की सुबह लोकसभा में 288 सदस्यों ने समर्थन दिया और 232 ने विरोध किया। इससे पहले बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी सुप्रीम कोर्ट में विधयेक की वैधता को चुनौती देते हुए कहा था कि यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान संसद में बुधवार को ओवैसी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ विधेयक के जरिए मुसलमानों के साथ गलत व्यवहार किया जाएगा। ओवैसी ने कहा, "यह विधेयक मुसलमानों पर हमला है। मोदी सरकार ने मेरी आजादी पर जंग छेड़ दी है। मेरी मस्जिदें, मेरी दरगाहें, मेरे मदरसे निशाने पर हैं। यह सरकार सच सामने नहीं ला रही है। यह विधेयक अनुच्छेद 14- समान संरक्षण का उल्लंघन करता है। सीमाएं लगाई जाएंगी। ऐसा करने से अतिक्रमणकारी मालिक बन जाएगा और एक गैर-मुस्लिम वक्फ बोर्ड का प्रशासन चलाएगा। यह विधेयक समानता कानून का भी उल्लंघन करता है।"

वहीं, कांग्रेस सांसद की याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधेयक वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन पर मनमाने प्रतिबंध लगाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता कमज़ोर होती है। अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि इसमें ऐसे प्रतिबंध लगाए गए हैं जो अन्य धार्मिक बंदोबस्तों के प्रशासन में मौजूद नहीं हैं।

बिहार के किशनगंज से लोकसभा सांसद जावेद इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य थे और उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि यह विधेयक किसी व्यक्ति के धार्मिक अभ्यास की अवधि के आधार पर वक्फ के निर्माण पर प्रतिबंध लगाता है। इस तरह की सीमा इस्लामी कानून, रीति-रिवाज या मिसाल में निराधार है और अनुच्छेद 25 के तहत धर्म को मानने और उसका पालन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है। याचिका में दावा किया गया है कि प्रतिबंध उन लोगों के साथ भेदभाव करता है जिन्होंने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया है और धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संपत्ति समर्पित करना चाहते हैं, जिससे संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन होता है। अनुच्छेद 15 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध से संबंधित है।

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Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.