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मनोरंजन

बॉलीवुड फिल्मकार पार्थो घोष का निधन

मुंबई,

 बॉलीवुड के जानेमाने फिल्मकार पार्थो घोष का आज निधन हो गया वह 76 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने की वजह से पार्थो घोष का निधन हुआ है। पार्थो घोष ने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में दीं, जिसमें जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित की फिल्म '100 डेज', मिथुन चक्रवर्ती के साथ ‘दलाल’ नाना पाटेकर-जैकी श्राफ की 'अग्नि साक्षी' जैसी फिल्में भी शामिल हैं।

पार्थो घोष का जन्म 08 जून 1949 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में हुआ था। उनका बचपन साहित्य, कला और संगीत में ही बीता। सिनेमा के प्रति जुनून ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की तरफ आकर्षित किया था। वर्ष 1985 में उन्होंने एक सहायक निर्देशक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की।

पार्थो घोष ने वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म '100 डेज' का निर्देशन किया। इस संस्पेंस-थ्रिलर फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों द्वारा अच्छा रिस्पांस मिला था। इस फिल्म में माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिका में थे। इसके बाद पार्थो घोष ने वर्ष 1992 में दिव्या भारती और अविनाश वधावन अभिनीत 'गीत' का निर्देशन किया। वर्ष 1993 में पार्थो घोष ने सुपरहिट फिल्म ‘दलाल’ का निर्देशन किया। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और आयशा जुल्का ने मुख्य भूमिका निभायी थी।

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पार्थो घोष निर्देशित वर्ष 1996 में प्रदर्शित फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ में जैकी श्राफ,मनीषा कोइराला और नाना पाटेकर ने अहम भूमिका निभायी थी।इस फिल्म में मनीषा ने घरेलू हिंसा का शिकार हुई एक महिला का चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया था। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और मनीषा कोइराला ने अपने अभिनय के लिए खूब तारीफें बटोरीं। वर्ष 1997 में प्रदर्शित फिल्म ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ में पार्थो घोष ने एक बार फिर नाना पाटेकर को एक अलग अंदाज़ में पेश किया, जो दर्शकों को काफी पसंद आया। पार्थो घोष ने 'जीबन युद्ध' (1997), 'कौन सच्चा कौन झूठा' (1997), 'युगपुरुष' (1998), 'खोटे सिक्के' (1998), 'मसीहा' (2002), 'एक सेकंड…जो जिंदगी बदल दे?' (2010) जैसी फिल्मों के लिए भी जाना जाता है।पार्थो घोष की आखिरी निर्देशित फिल्म 'मौसम इकरार के दो पल प्यार के' थी , जो साल 2018 में रिलीज हुई थी।

 

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.