बुधवार, 13 मई को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी रहीं, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई राहत या झटका नहीं लगा। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए इस स्थिरता पर सवाल उठाया। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये के नुकसान को वहन करने की क्षमता पर चिंता व्यक्त की, जिससे ईंधन की कीमतों में आसन्न वृद्धि की अटकलें तेज हो गई हैं। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जिसने तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।
क्या है मौजूदा स्थिति और मंत्री की चेतावनी
तेल विपणन कंपनियाँ दैनिक आधार पर सुबह 6 बजे वैश्विक कच्चे तेल के बेंचमार्क और विदेशी विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के अनुरूप पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन करती हैं। इसके बावजूद, 13 मई, बुधवार को मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अन्य शहरों में ईंधन की कीमतें अपरिवर्तित रहीं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक व्यावसायिक शिखर सम्मेलन में बोलते हुए स्पष्ट किया कि तेल कंपनियाँ उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बाजार मूल्य से कम पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। उन्होंने कहा, “वे उपभोक्ताओं को बचाने के लिए घाटा उठा रहे हैं। लेकिन किसी न किसी स्तर पर सरकार को कोई निर्णय लेना होगा।” पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि तेल कंपनियाँ कितने समय तक इन नुकसानों को वहन कर पाएंगी, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न हुई है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
प्रमुख शहरों में 13 मई को ईंधन की कीमतें इस प्रकार थीं:
* नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67
* मुंबई: पेट्रोल ₹103.49, डीजल ₹90.01
* कोलकाता: पेट्रोल ₹104.99, डीजल ₹91.81

* चेन्नई: पेट्रोल ₹100.79, डीजल ₹92.38
* बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.90, डीजल ₹88.99
* हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.45, डीजल ₹95.70
* पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹92.09
* लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80
* नोएडा: पेट्रोल ₹94.87, डीजल ₹88.00
* जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21
तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव
हरदीप सिंह पुरी ने तेल खुदरा विक्रेताओं पर पड़ रहे महत्वपूर्ण वित्तीय दबाव को उजागर किया। उनके अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनियों को 2 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित अंडर-रिकवरी (बाजार मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) और लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। यह भारी नुकसान पिछले वित्तीय वर्ष में अर्जित लाभ को भी मिटा सकता है। तेल कंपनियाँ अक्सर वैश्विक कीमतों में वृद्धि होने पर उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डालती हैं, जिससे उन्हें अंडर-रिकवरी और नुकसान का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं। मंत्री ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि यह वित्तीय दबाव कंपनियों की परिचालन क्षमता और भविष्य के निवेश को प्रभावित कर सकता है।
मूल्य वृद्धि का कारण और भविष्य की राह
ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि का मुख्य कारण तेल कंपनियों द्वारा लगातार झेले जा रहे भारी नुकसान और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट है। यह संकट कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है और वैश्विक कीमतों को और बढ़ा सकता है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार “कठोर उपाय” अपनाने से बच सकती है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाता है और कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास गिर जाती हैं, तो सरकार को हस्तक्षेप करने या कंपनियों को कीमतों में वृद्धि की अनुमति देने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट की संभावना कम ही दिख रही है। ऐसे में, सरकार और तेल कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती है कि वे उपभोक्ताओं पर अत्यधिक बोझ डाले बिना वित्तीय स्थिरता कैसे बनाए रखें। भविष्य में ईंधन की कीमतों में वृद्धि एक आवश्यक कदम हो सकता है, लेकिन इसका समय और सीमा अभी स्पष्ट नहीं है।











