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दृष्टि का भविष्य: 3डी प्रिंटिंग, स्टेम सेल और डॉ. वीरेंद्र सांगवान की क्रांतिकारी यात्रा

नई दिल्ली(मेघा तिवारी की रिपोर्ट)। तरल कॉर्निया प्रत्यारोपण में डॉ. वीरेंद्र सांगवान की क्रांतिकारी चिकित्सा उपलब्धि।

नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में, भारत में जल्द ही तरल (कृत्रिम) कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए मानव परीक्षण शुरू होने वाले हैं। 3डी प्रिंटिंग और स्टेम सेल तकनीक के माध्यम से विकसित यह नवाचार संभावित रूप से अंधेपन के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इस अत्याधुनिक तकनीक से कॉर्नियल डोनर की आवश्यकता समाप्त हो सकती है, जिससे लाखों दृष्टिहीन लोगों को नया जीवन मिल सकता है।

वर्तमान में, कॉर्नियल डोनर की वैश्विक कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। भारत सहित कई देशों में हजारों लोग कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा करने को मजबूर होते हैं। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो यह कॉर्नियल प्रत्यारोपण को अधिक सुलभ और व्यापक रूप से उपलब्ध बना सकती है।

वैश्विक स्वीकृति और सफलता की ओर बढ़ते कदम

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यह अत्याधुनिक परियोजना पहले ही जानवरों पर सफलतापूर्वक परीक्षण कर चुकी है—यहां तक कि COVID-19 महामारी के दौरान भी अनुसंधान जारी रहा। अब इसे दुनिया के सभी प्रमुख दवा नियामक निकायों से मंज़ूरी मिल चुकी है, जिससे मानव परीक्षण की राह खुल गई है।

इस ऐतिहासिक पहल की अगुवाई विश्व प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सांगवान कर रहे हैं, जो पैंडोरम टेक्नोलॉजीज और डॉ. श्रॉफ के चैरिटी आई हॉस्पिटल के सहयोग से इस परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन यह पहला अवसर नहीं है जब डॉ. सांगवान नेत्र चिकित्सा में क्रांति लाने के केंद्र में रहे हैं।

डॉ. वीरेंद्र सांगवान: भारत में नेत्र देखभाल के अग्रणी

डॉ. वीरेंद्र सांगवान का नाम नेत्र विज्ञान में सफलता और नवाचार का पर्याय बन चुका है। उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जिसे अक्सर “भारतीय नोबेल पुरस्कार” भी कहा जाता है। उनके द्वारा किए गए अनुसंधान ने हजारों लोगों—विशेष रूप से वंचित वर्गों—को दृष्टि प्रदान की है।

हरियाणा के एक छोटे से गाँव से हार्वर्ड तक की उनकी यात्रा दृढ़ता, दूरदर्शिता और सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उनकी चिकित्सा यात्रा की शुरुआत ऑर्बिस इंटरनेशनल के साथ हुई, जो एक फ्लाइंग आई हॉस्पिटल (एयरबोर्न सर्जिकल सेंटर) संचालित करता था। यह विमान पूरी तरह से सुसज्जित नेत्र शल्य चिकित्सा केंद्र के रूप में कार्य करता था और दूर-दराज़ के इलाकों में आँखों की सर्जरी उपलब्ध कराता था।

डॉ. सांगवान की असाधारण प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें जल्द ही न्यूयॉर्क स्थित ऑर्बिस इंटरनेशनल में चिकित्सा निदेशक बना दिया। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पहले भारतीय थे। इसके बाद, उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक नेत्र तकनीकों का अध्ययन किया और भारत में अंधेपन के समाधान के लिए अभिनव उपचार विकसित करने का संकल्प लिया।

भारत में अंधेपन की चुनौती और पुनर्योजी चिकित्सा की भूमिका

भारत में अंधापन एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। 1990 के दशक में, जब डॉ. सांगवान अपने कौशल को विकसित कर रहे थे, तब विश्व की एक-तिहाई अंधी आबादी भारत में निवास करती थी। आज भी, आधुनिक चिकित्सा प्रगति के बावजूद, भारत अंधेपन का सबसे बड़ा वैश्विक बोझ वहन कर रहा है।

इसकी मुख्य वजहें हैं:
✔ नेत्र चिकित्सा सेवाओं तक सीमित पहुंच
✔ रोकथाम योग्य नेत्र रोगों का प्रचलन
✔ प्रशिक्षित नेत्र विशेषज्ञों की कमी

हालांकि, डॉ. सांगवान जैसे दूरदर्शी चिकित्सकों की बदौलत पुनर्योजी चिकित्सा और नवीन सर्जिकल तकनीकों में तेज़ी से सुधार हो रहा है। इस दिशा में, तरल कॉर्निया प्रत्यारोपण एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

डॉ. सांगवान की प्रेरणादायक जीवनी: “अनबाउंड”

हाल ही में, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने डॉ. वीरेंद्र सांगवान की जीवनी “अनबाउंड” प्रकाशित की। “अनबाउंड – ए नॉन कन्फ़ॉर्मिस्ट्स गाइड टू डिफाइंग नॉर्म्स एंड रेवोल्यूशनाइज़िंग हेल्थकेयर” शीर्षक वाली यह पुस्तक उनके संघर्ष, उपलब्धियों और चिकित्सा में उनके योगदान को उजागर करती है।

प्रतिभाशाली लेखक राजरोशन पुजारी द्वारा लिखी गई यह किताब एक रोमांचक उपन्यास जैसी शैली में प्रस्तुत की गई है, जो मेडिकल छात्रों, शोधकर्ताओं और युवा डॉक्टरों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह सिर्फ़ एक जीवनी नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, वैज्ञानिक अनुसंधान और मानवता की सेवा का एक प्रेरक दस्तावेज़ है।

वैश्विक हस्तियों की प्रशंसा

“अनबाउंड” को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। पुस्तक को समर्थन देने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में शामिल हैं:

परम पावन दलाई लामा

डॉ. दीपक चोपड़ा (आध्यात्मिक गुरु)

अन्ना हजारे (सामाजिक कार्यकर्ता)

किशोर बियाणी (बिजनेस टाइकून)

हैदराबाद में ब्रॉडवे बुक स्टोर में हुए भव्य सॉफ्ट लॉन्च में भी इस पुस्तक ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन बिजनेस दिग्गज किशोर बियाणी के सहयोग से किया गया था और इसमें देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों ने भाग लिया।

भविष्य की राह: नेत्र चिकित्सा में संभावनाओं की नई किरण

तरल कॉर्निया प्रत्यारोपण और नेत्र विज्ञान में डॉ. वीरेंद्र सांगवान के योगदान को पूरी दुनिया में उत्सुकता से देखा जा रहा है। इस तकनीक के सफल होने पर यह लाखों लोगों के लिए एक नई आशा की किरण बन सकती है।

डॉ. सांगवान की कहानी केवल उनके व्यक्तिगत सफर तक सीमित नहीं है—यह एक वैज्ञानिक क्रांति, नवाचार और सेवा भावना का प्रतीक है। उनकी दृढ़ता, अनुसंधान के प्रति समर्पण और समाज को बेहतर बनाने की इच्छा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

नेत्र विज्ञान के इस नए युग में, डॉ. वीरेंद्र सांगवान की यात्रा भारत के चिकित्सा जगत में मील का पत्थर साबित हो रही है। 🚀👁️

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.