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भारतीय सेना जल्द ही स्वदेशी आर्टिलरी गन से लैस होगी, सरकार ने 7000 करोड़ रुपए के सौदे को दी मंजूरी

नई दिल्ली
भारतीय सेना जल्द ही स्वदेशी आर्टिलरी गन से लैस होगी। देश के रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 7000 करोड़ रुपए के सौदे को मंजूरी दे दी है। मामले से अवगत अधिकारियों ने गुरुवार को बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने स्थानीय रूप से निर्मित 307 तोपों के साथ-साथ टोइंग व्हीकल्स के लिए 7,000 करोड़ रुपये के सौदे पर मुहर लगा दी है।

अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है कि इस ATAGS ( एडवांस्ड टॉड आर्टिलरी गन सिस्टम) सौदे में 327 टोइंग ट्रक भी शामिल हैं, जिससे मार्च के अंत तक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का रास्ता साफ हो गया है। 155 मिमी/52-कैलिबर की इस तोप की रेंज लगभग 48 किमी है। नई तोपों की खरीद से भारत में आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और इससे भारतीय सेना की तैयारी भी बढ़ेगी। सेना ने 2017 से अब तक 720 मिलियन डॉलर के अनुबंध के तहत 100 ऐसी तोपों को अपने बेड़े में शामिल किया है और उनमें से कई को पहाड़ों में संचालन को सक्षम करने के लिए अपग्रेड करने के बाद लद्दाख सेक्टर में तैनात किया गया है। तोपों को मूल रूप से रेगिस्तानी इलाकों के लिए खरीदा गया था।

ATAGS प्रोजेक्ट क्या है?
बता दें कि DRDO ने 2013 में ATAGS प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य सेना की पुरानी तोपों को आधुनिक 155mm आर्टिलरी गन सिस्टम से बदलना था। DRDO ने तोप के निर्माण के लिए दो निजी फर्मों, भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ समझौता किया है। यह ऑर्डर दोनों कंपनियों के बीच विभाजित किया जाएगा। भारत फोर्ज, जो ATAGS टेंडर के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है, 60% तोपों का निर्माण और आपूर्ति करेगी। वहीं बचे हुए 40 फीसदी तोपों का उत्पादन TASL द्वारा किया जाएगा।

रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
इससे पहले 1 फरवरी को भारत ने केंद्रीय बजट में रक्षा बजट के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की थी। इसमें सेना के आधुनिकीकरण के लिए 1.8 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। सेना की खरीदारी सूची में फिलहाल कई लड़ाकू जेट, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बी, टैंक, तोपें, ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल शामिल हैं। आधुनिकीकरण के बजट का 75% रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए घरेलू स्रोतों से हथियार और उपकरण खरीदने पर खर्च किया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2015-19 और 2020-24 के बीच भारत का हथियार आयात 9.3 फीसदी तक कम हो गया है।

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Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.