LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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मध्य प्रदेश

अमूल की तरह अब सांची भी होगा ग्लोबल ब्रांड, घी, पनीर, श्रीखंड जैसे प्रोडक्ट होंगे निर्यात

 भोपाल

 मध्यप्रदेश के दुग्ध उत्पादों का स्थानीय ब्रांड सांची अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखने जा रहा है। उसने सबसे पहले नेपाल और भूटान के बाजार में अपने दुग्ध उत्पाद बेचने की तैयारी की है। विदेश में सहकारी संघों के उत्पाद निर्यात करने वाली एजेंसी से स्वीकृति मिलते ही सांची के उत्पाद विदेशी धरती पर भी बिकने लगेंगे।

मिठाइयां और घी बेचने की तैयारी

नेपाल व भूटान में सफलता के बाद श्रीलंका और बांग्लादेश में उत्पाद उतारे जाएंगे। विदेश में पहले सांची की मिठाइयां और घी बेचने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में ऐसे प्रोडक्ट भेजे जाएंगे, जिन्हें स्टोर करने की समस्या न हो। सांची का घी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले उत्पादों में शामिल है। पेड़े भी बेहद पसंद किए जाते हैं। इन उत्पादों को विदेश के सुपर मार्केट और माल में उतारा जाएगा, ताकि सीधे लोगों तक पहुंचें।

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फीडबैक और मांग के आधार पर निर्यात पर विचार

बाजार में इनके फीडबैक और मांग के आधार पर सांची के अन्य उत्पादों के निर्यात पर विचार किया जाएगा। सांची ने निर्यात के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल भारतीय निर्यात निरीक्षण परीक्षा से अनुमति का इंतजार है। इसके बाद सहकारी निर्यातों का समन्वय करने वाली संस्था नेशनल कोआपरेटिव फार एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) की अनुमति लेनी होगी। इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही सांची के उत्पाद विदेश में जा सकेंगे। हालांकि इससे पहले कमोडिटी मार्केट में सांची का पाउडर और बटर बेचा जा रहा है, लेकिन इन उत्पादों पर सांची की ब्रांडिंग नहीं होती है। बता दें कि प्रदेश में सांची के चार प्लांटों में दुग्ध उत्पाद बनाए जाते हैं।

सांची को वैश्विक ब्रांड के रूप में करेंगे स्थापित

सांची के उत्पादों को विदेश के बाजारों तक पहुंचाकर इसे वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करेंगे। फिलहाल हम निर्यात करने के शुरुआती चरण में हैं और निर्यात करने वाली संस्थाओं से स्वीकृति मिलने के कुछ समय बाद हम नेपाल और भूटान में अपने उत्पाद भेजेंगे। -सतीश कुमार एस, महाप्रबंधक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी संघ।

सांची के बाय प्रोडक्ट देश-विदेश में एक्सपोर्ट होंगे खंडेलवाल बताते हैं कि मध्यप्रदेश में अभी सांची का ज्यादातर काम मिल्क प्रोसेसिंग का है। अब एनडीडीबी मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने से लेकर कलेक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर फोकस करेगा। बोर्ड सांची दूध से बने उत्पादों में अमूल की तरह आइसक्रीम, चॉकलेट, घी, पनीर, श्री खंड जैसे बाय प्रोडक्ट बनाकर देश-विदेश में एक्सपोर्ट करेगा।

सांची के प्लांट्स में लगभग 40 साल पुरानी मशीनरी से काम हो रहा है। एनडीडीबी अब मशीनों के मॉडर्नाइजेशन पर काम करेगा। यानी जरूरत के हिसाब से आधुनिक मशीनें लगाएगा ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ सके।

दुग्ध संघों में होगा समन्वय मध्यप्रदेश में अभी 6 दुग्ध संघ हैं, जो अपने-अपने क्षेत्रों में सीमित दायरे में काम कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि भोपाल में पेड़ा का उत्पादन अधिक है और जबलपुर में कम, तो वहां स्थानीय स्तर पर शॉर्टेज की स्थिति बन जाती है।

अब राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) पूरे प्रदेश में उत्पादन से संबंधित कार्यों की निगरानी मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ के माध्यम से करेगा। यह तय करेगा कि किस प्रोडक्ट का कहां कितना उत्पादन है और कहां किस प्रोडक्ट की कितनी खपत है। यदि अन्य राज्यों की बात करें तो जैसे दिल्ली में दूध की खपत तो अधिक है, लेकिन वहां पर्याप्त उत्पादन नहीं होता। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश से दिल्ली तक दूध की आपूर्ति की जाएगी।

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.