LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश सरकार ने सांस्कृतिक विरासत नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान’ की घोषणा की

उज्जैन 

भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने को मध्य प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से स्वीकृति लेकर यह तय किया है कि उज्जैन के यशस्वी सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर अब हर वर्ष ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।

यह भारत का पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार होगा जो संस्कृति, न्याय, विज्ञान और जनकल्याण जैसे सार्वभौमिक मूल्यों पर सम्राट विक्रमादित्य की छवि वाले विश्व के श्रेष्ठतम व्यक्तित्व को दिया जाएगा।

राज्य सरकार और भारत सरकार के सहयोग से प्रारंभ हो रहे इस पुरस्कार की राशि एक करोड़ रुपये से अधिक होगी। यह सम्मान हर वर्ष उन विशिष्ट वैश्विक व्यक्तित्वों को मिलेगा जिन्होंने अपने जीवन और कार्यों से सम्राट विक्रमादित्य के उच्च आदर्शों- सुशासन, दानशीलता, प्रज्ञा, न्यायप्रियता, विज्ञानबोध, संस्कृति-प्रेम और लोककल्याण का उदाहरण प्रस्तुत किया हो।

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इसके पहले प्रदेश सरकार 21 लाख रुपये का ‘सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय सम्मान’ और पांच-पांच लाख रुपये के तीन प्रादेशिक शिखर सम्मान कर घोषणा कर चुकी है। इन सम्मानों की शुरुआत इसी वर्ष विक्रमोत्सव के दौरान की जानी थी, किंतु पात्र व्यक्तियों का चयन समय पर न हो पाने के कारण यह प्रक्रिया स्थगित रही।

अब अंतरराष्ट्रीय सम्मान की घोषणा के साथ ही यह योजना नई दिशा में प्रवेश कर रही है यानी समारोह भी अब भव्य होगा। अब यह स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश केवल भौगोलिक या प्रशासनिक नेतृत्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रहा है। भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी राज्य ने ऐसे पुरस्कार की नींव रखी है, जो राष्ट्र की परंपरा, मानवीय मूल्यों और वैश्विक विचारधारा को एकसाथ जोड़ता है।

मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा जो भारत सरकार के सहयोग से किसी व्यक्ति को विक्रमादित्य के मूल्यों के आधार पर वैश्विक स्तर पर सम्मान करेगा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत की संस्कृति, ज्ञान और मूल्यों को विश्व मंच पर एक नई प्रतिष्ठा दिलाएगा।
सम्राट विक्रमादित्य : परंपरा के प्रज्वलित प्रतीक

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास में शकारि, संवत् प्रवर्तक और न्यायप्रिय राजा के रूप में अमर हैं। उन्होंने विदेशी आक्रांताओं को परास्त कर विक्रम संवत की स्थापना की और भारतीय कालगणना को प्रतिष्ठा दिलाई। कला, विज्ञान, खगोल, नीतिशास्त्र, योग और राजनीति में उनका योगदान अतुलनीय था।

माना जाता है कि दो हजार वर्ष पूर्व उन्होंने ही अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण करवाया था। उनके सुशासन की स्मृति भारतवर्ष में आज भी जीवित है। रामराज्य के बाद यदि किसी आदर्श शासन का उल्लेख होता है तो वह विक्रमादित्य का होता है।
विक्रम अलंकरण से अंतरराष्ट्रीय सम्मान तक

मध्य प्रदेश सरकार अब तक ‘विक्रम अलंकरण’ के माध्यम से उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित करती रही है, जिनमें सम्राट विक्रमादित्य के ‘नवरत्नों’ की प्रतिभा दिखती हो। नवरत्नों में धन्वंतरि (चिकित्सा), कालिदास (साहित्य), वराहमिहिर (खगोल), शंकु (वास्तु), वररुचि (व्याकरण), घटकर्पर (नीति), बेतालभट्ट (कथा), क्षपणक (तत्वज्ञान) और अमरसिंह (शब्दकोश) जैसे विद्वान शामिल थे। यही परंपरा अब वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित होने जा रही है।

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.