मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान को व्यापक जनसहभागिता मिल रही है, जिससे जल संरक्षण को नई मजबूती मिली।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनभागीदारी मिल रही है। जल संरक्षण और संवर्धन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस अभियान में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जल स्रोतों का संरक्षण और वर्षा जल का अधिकतम संचयन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान के तहत गांवों में तालाबों की सफाई, जल स्रोतों का संरक्षण, नालों का उपचार, जल संचयन संरचनाओं का निर्माण तथा वर्षा जल संरक्षण से जुड़े अनेक कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के माध्यम से लोगों को जल बचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाकर कृषि, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत बनाना है। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में अभियान के तहत श्रमदान, पौधारोपण और जल संरक्षण संबंधी गतिविधियों में बड़ी संख्या में लोग हिस्सा ले रहे हैं। महिलाओं, युवाओं, किसान समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर सतत विकास की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने गांव और आसपास के जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा वर्षा जल संचयन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
सरकार का विश्वास है कि जनसहभागिता के बल पर ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान प्रदेश में जल संकट के समाधान की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित होगा। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




