फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक महत्वाकांक्षी आर्थिक कॉरिडोर और वैश्विक कौशल गतिशीलता तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव 17 जून, 2026 को G7 साझेदारों के साथ ‘सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करना’ नामक एक आउटरीच सत्र में प्रस्तुत किया गया, जिसका उद्देश्य विकासशील देशों के साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। भारत की यह पहल वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज़ को बुलंद करने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ग्लोबल साउथ के लिए मोदी का विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रस्ताव में विशेष रूप से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप समूह के देशों के लिए कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) के विजन की तरह, क्या हम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप समूह के देशों के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं?” यह बयान ग्लोबल साउथ के लिए एक व्यापक और समावेशी विकास मॉडल की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह विजन सिर्फ बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कौशल विकास और लोगों के आवागमन को सुगम बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि इन क्षेत्रों में आर्थिक अवसर बढ़ सकें।
IMEC और नई पहल IMPACT
G7 शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी ने एक नई पहल का प्रस्ताव भी रखा, जिसे उन्होंने IMPACT (International Mobilisation Partnership for Accelerating Connectivity and Trade) नाम दिया। यह एक्रोनिम, जिसके लिए मोदी अपनी पसंद के लिए जाने जाते हैं, G7 देशों की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के देशों के स्वामित्व को मिलाकर कनेक्टिविटी और व्यापार को गति देने की परिकल्पना करता है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब IMEC परियोजना को पश्चिम एशिया में कई संघर्षों के कारण देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें गाजा-इजरायल संघर्ष और हाल ही में ईरान, अमेरिका व इजरायल के बीच तनाव शामिल है। IMEC परियोजना की घोषणा सितंबर 2023 में नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन में की गई थी, और इसे वैश्विक व्यापार मार्गों को नया आकार देने की क्षमता के साथ एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा था।
चुनौतियों के बीच कनेक्टिविटी का महत्व
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण IMEC जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी के बावजूद, भारत कनेक्टिविटी और आर्थिक एकीकरण के अपने एजेंडे को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है। IMPACT का प्रस्ताव इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विकासशील देशों के हितों को प्राथमिकता दे रहा है। यह न केवल व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और आर्थिक अवसरों का एक अभिन्न अंग बनें। कौशल गतिशीलता तंत्र से इन देशों के युवाओं को नए अवसरों तक पहुँचने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं में योगदान करने में मदद मिलेगी।
द्विपक्षीय वार्ता और भविष्य की राह
G7 शिखर सम्मेलन के इतर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के साथ बातचीत की, जो इन महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से थीं। ये बैठकें भारत की बहुआयामी विदेश नीति का हिस्सा हैं, जहाँ वह वैश्विक मंचों का उपयोग न केवल बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए करता है, बल्कि प्रमुख देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को भी गहरा करता है। ग्लोबल साउथ के लिए मोदी के प्रस्तावों को भविष्य में वैश्विक आर्थिक विकास और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत को एक जिम्मेदार और अग्रणी वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।






