LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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देश

गृह मंत्री के आगामी बिहार दौरे पर प्रशांत किशोर का कटाक्ष

 बिहार

 जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी बिहार दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब चुनाव हैं, इसलिए नवंबर तक उन्हें सिर्फ बिहार ही दिखेगा।

11 साल में भाजपा बिहार में फैक्ट्री नहीं लगा पाई
प्रशांत किशोर गुरूवार को जन सुराज उद्घोष यात्रा के तहत एक दिवसीय दौरे पर गोपालगंज पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पत्रकारों से बातचीत की। इस मौके पर किशोर ने कहा कि अब नवंबर तक हर केंद्रीय योजना का शिलान्यास बिहार से होगा, किसान सम्मान निधि का पैसा भी बिहार से भेजा जाएगा। लेकिन यदि गृह मंत्री को वाकई बिहार और बिहार के बच्चों की इतनी चिंता है तो बिहार के जो बच्चे गुजरात की फैक्ट्रियों में मात्र 12 हजार रुपये में काम कर रहे हैं, उन्हें गुजरात के मजदूरों के बराबर फैक्ट्रियों में मजदूरी दिलवाएं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के 11 साल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार में फैक्ट्री नहीं लगा पाई। इसलिए गृह मंत्री से हमारी मांग है कि वे सूरत, मोरबी की फैक्ट्रियों में काम कर रहे बिहार के बच्चों को भी गुजरात के मजदूरों के बराबर मजदूरी दिलवाएं।

कांग्रेस की यात्रा पर भी किया कटाक्ष
प्रशांत किशोर ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह जन सुराज के प्रयास की ताकत है कि आज दूसरे राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता जमीन पर जाकर जनता से संवाद स्थापित कर रहे हैं। कांग्रेस की यात्रा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि 1985 में बिहार में कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी थी और उसे भी जागने में 40 साल लग गए। जन सुराज के आने से दूसरे राजनीतिक दलों को यह एहसास हो गया है कि यदि वे काम नहीं करेंगे तो जनता उन्हें नकार देगी। राजद भी मुसलमानों को अपना राजनीतिक बंधुआ मजदूर नहीं समझेगी और न ही भाजपा और जनता दल यूनाईटेड (JDU) जो यह सोचती है कि हिंदू समाज के कुछ लोग लालू प्रसाद यादव के डर से उन्हें ही वोट देंगे, वे भी जन सुराज के आने से डरेंगे। उन्होंने कहा कि अगर जन सुराज के प्रयास से बिहार में फिर से लोकतंत्र जिंदा हो रहा है तो यह बिहार की जनता के लिए अच्छी खबर है।

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Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.