LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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पंजाब

होशियारपुर में रेलवे ने नहीं दिया गेटमैन, सरपंच ने संभाला मोर्चा, रोजाना ट्रेन को दिखाते हैं हरी झंडी

होशियारपुर 

गढ़शंकर के गांव बसियाला के सरपंच गुरदेव सिंह बिना गार्ड वाले रेलवे क्रॉसिंग पर एक अनौपचारिक गेटमैन की भूमिका निभा रहे हैं। सरपंच गुरदेव सिंह खुद मोर्चा संभालते हुए फाटक खोलते और बंद करते हैं। रेलवे विभाग ने अब तक फाटक पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया है, जिसके कारण सरपंच को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। इस स्थिति के चलते गांववासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

सरपंच गुरदेव सिंह ने कहा कि मुझे डर है कि कभी भी किसी बड़े हादसे का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण मुझे खुद फाटक खोलने और बंद करने का काम करना पड़ता है। हमने कई बार अधिकारियों से इस मामले में मदद मांगी है, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला।

हमें एक रास्ता यहां से रेलवे ने दिया है जो नवांशहर के गांव मुबारिकपुर में निकलता है। जबकि हमारे गांव बसियाला व रसूलपुर गढ़शंकर में पड़ते है। इसके अलावा यह रास्ता दोपहर और शाम के समय महिलाओं के अकेले आने जाने के लिए तो खतरनाक है। गन्ने की ट्रॉलियां भी इस रास्ते से नहीं निकल सकती। गांव वासियों के फाटक पर पहले एक व्यक्ति दस हजार सैलरी पर रखा था। वह भी काम छोड़ गया। उसके बाद से मैं खुद ही फाटक खोलने बंद करने का काम करता हूं। 

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ग्रामीणों ने चंदा इकठ्ठा कर लगवाया फाटक
फाटक नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर फाटक लगवाया, ताकि आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसके बावजूद कई बार रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यहां कर्मचारी तैनात करने की मांग की गई और इसके लिए ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कुछ समय के लिए ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को मासिक वेतन पर रखा भी, लेकिन कुछ ही समय बाद वह काम छोड़कर चला गया। 

सरपंच में खुद संभाली जिम्मेदारी
इसके बाद सरपंच गुरदेव सिंह ने खुद यह जिम्मेदारी संभाल ली. वह दिन में दो बार, जब ट्रेन आने का समय होता है. अपनी दुकान छोड़कर फाटक पर पहुंचते हैं. पहले वह मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से फोन पर ट्रेन की जानकारी लेते हैं, फिर समय पर फाटक बंद कर देते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को सुरक्षित गुजरने का संकेत देते हैं। 

न हो कोई हादसा इसलिए खुद ली जिम्मेदारी
गुरदेव सिंह का कहना है कि उन्हें हमेशा इस बात का डर रहता है कि कहीं लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा न हो जाए, इसलिए उन्होंने इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मान लिया है. गांव के लोग भी उनके इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं। 

गांववासियों का कहना है कि यह रास्ता महिलाओं और बच्चों के लिए भी खतरनाक हो सकता है, खासकर जब वे अकेले इस रास्ते से गुजरती हैं। गांववासियों ने बार-बार विभिन्न नेताओं और अधिकारियों को ज्ञापन देकर रेलवे से इस फाटक पर कर्मचारी तैनात करने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहले रेलवे ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, लेकिन गांववासियों के संघर्ष के बाद इसे फिर से खोला गया। हालांकि, फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती अभी तक नहीं की गई है।

पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने हाल ही में केंद्रीय राज्य रेलवे मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मिलकर इस समस्या का समाधान करने की अपील की थी। बिट्टू ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी और एक टीम भेजकर कर्मचारी तैनात किया जाएगा।

गांववासियों की मांग है कि रेलवे विभाग शीघ्र इस समस्या का समाधान करें और फाटक पर सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करें, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.