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पितृ पक्ष में दो तिथियों के श्राद्ध होंगे एक साथ, जानें सही तरीके से पिंडदान कैसे करें

साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है. हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होते हैं और आश्विन माह की अमावस्या तिथि पर समाप्त होते हैं. साल 2025 में पितृ पक्ष की अंतिम श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन 21 सितंबर के दिन किया जाएगा.

साल 2025 में श्राद्ध की दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं. पंचांग के अनुसार इस वर्ष तृतीया और चतुर्थी तिथि का श्राद्ध एक ही तिथि पर पड़ रहा है. इन दोनों की तिथि के श्राद्ध 10 सितंबर 2025 के दिन किए जाएंगे.

इन दो तिथि का श्राद्ध होगा एक साथ

तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, 2025 बुधवार
तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण तृतीया तिथि के दिन है. इस दिन इन लोगों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की तृतीया तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है.तृतीया श्राद्ध को तीज श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है.

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तृतीया श्राद्ध करने का समय-

    कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
    रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से 01 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
    अपराह्न काल – दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक रहेगा.

चतुर्थी श्राद्ध 10 सितंबर, 2025, बुधवार

आश्विन, कृष्ण चतुर्थी तिथि के दिन है. चतुर्थी श्राद्ध परिवार के उन मृत सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है.

चतुर्थी श्राद्ध करने का समय-

    कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
    रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
    अपराह्न काल – दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक रहेगा.

दो तिथियों के श्राद्ध और पिंडदान की विधि

    इस दिन सुबह स्नान आदि करके साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें.
    घर के पूजा स्थल को गंगाजल स्वच्छ करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें.
    दो तिथियों के लिए अलग-अलग संकल्प करें.
    संकल्प में दोनों तिथियों के पितरों का नाम, गोत्र, और मृत्यु तिथि शामिल करें.
    तांबे के लोटे में गंगाजल, काले तिल, जौ, और दूध मिलाकर तर्पण करें.
    प्रत्येक तिथि के लिए तीन बार जल अर्पित करें.
    चावल, जौ, काले तिल, और घी को मिलाकर पिंड बनाएं. प्रत्येक तिथि के पितरों के लिए अलग-अलग पिंड तैयार करें.
    दो तिथियों पर दोनों तिथियों के पितरों के लिए अलग-अलग पिंड बनाएं.
    पिंडों को कुश के आसन पर रखें और गंगाजल, दूध, और तिल से अभिषेक करें.
    पिंडों को दक्षिण दिशा की ओर अर्पित करें और पितरों से आशीर्वाद मांगे.
    पिंडदान के बाद पिंडों को पवित्र नदी में विसर्जित करें या पीपल के पेड़ के नीचे रख दें.
    भोजन को केले के पत्ते या पत्तल पर परोसें और पितरों को अर्पित करें.
    ब्राह्मणों को भोजन कराएं. दोनों तिथियों के पितरों के लिए अलग-अलग ब्राह्मणों को आमंत्रित करें.
    ब्राह्मण को दक्षिणा, वस्त्र, और फल दान करें.

 

Rana Sikander
लेखक / Author

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.

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