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हरेली तिहार पर विष्णु सरकार का किसानों को नया संबल, बढ़ा मान-सम्मान

छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के पहले पारंपरिक त्योहार हरेली तिहार के पावन अवसर पर किसानों के मान-सम्मान में वृद्धि की है और खेती-किसानी को एक नया संबल प्रदान किया है। यह पहल राज्य की गहरी कृषि संस्कृति, समृद्ध परंपरा और अटूट आस्था से जुड़े इस पर्व के महत्व को रेखांकित करती है, जिससे किसानों में उत्साह और विश्वास का संचार हुआ है। सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देने के संकल्प को दर्शाता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

हरेली तिहार का महत्व और परंपरा

हरेली तिहार छत्तीसगढ़ का पहला पारंपरिक त्योहार है, जो हर साल सावन अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से कृषि और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर होता है। किसान इस दिन अपने कृषि औजारों, हल, बैल और ट्रैक्टर की विशेष पूजा करते हैं, उन्हें साफ कर तेल लगाते हैं और उनकी सलामती व उत्पादकता की कामना करते हैं। यह दिन प्रकृति के साथ मानव के गहरे संबंध को भी दर्शाता है, जहां किसान अपनी फसल की अच्छी पैदावार के लिए भूमि और प्रकृति का सम्मान करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन गेड़ी चढ़ने की परंपरा भी खूब प्रचलित है, बच्चे और युवा बांस की गेड़ी पर चढ़कर मनोरंजन करते हैं। यह त्योहार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, भाईचारे और ग्रामीण जीवन की खुशियों का प्रतीक भी है।

विष्णु सरकार की किसानों के लिए पहल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने हरेली तिहार के माध्यम से किसानों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है। सरकार का मानना है कि किसान ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके मान-सम्मान में वृद्धि तथा खेती-किसानी को संबल प्रदान करना राज्य के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, स्रोत सामग्री में किसी विशिष्ट योजना का उल्लेख नहीं है, लेकिन ‘नया संबल’ शब्द इस बात का संकेत देता है कि सरकार ने किसानों के लिए समर्थन मूल्य, खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं में सुधार या अन्य कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से राहत पहुँचाने का प्रयास किया है। सरकार का लक्ष्य कृषि को अधिक लाभकारी बनाना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है, ताकि वे बेहतर उपज प्राप्त कर सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। यह कदम किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें अपनी पारंपरिक खेती के प्रति और अधिक प्रेरित करने में सहायक होगा।

कृषि संस्कृति और परंपरा का सम्मान

विष्णु सरकार ने हरेली तिहार को केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए, इसे छत्तीसगढ़ की गौरवशाली कृषि संस्कृति और परंपरा से जोड़ा है। सरकार का यह प्रयास दर्शाता है कि वह राज्य की जड़ों और पहचान को बनाए रखते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ना चाहती है। यह दृष्टिकोण न केवल किसानों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सरकार पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कृषि पद्धतियों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हरेली जैसे त्योहारों को बढ़ावा देकर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक भावना और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह त्योहार किसानों को अपनी मेहनत का सम्मान करने और अपनी भूमि व औजारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है, जिसे सरकार के समर्थन से और अधिक बल मिला है।

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आगे की राह और किसानों की अपेक्षाएँ

विष्णु सरकार द्वारा हरेली तिहार पर किसानों को दिया गया यह संबल निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम लाएगा। इससे कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा और किसान अधिक उत्साह के साथ खेती के कार्यों में संलग्न होंगे। किसानों की अपेक्षा है कि सरकार यह समर्थन केवल त्योहारों तक सीमित न रखे, बल्कि साल भर उनकी समस्याओं पर ध्यान दे और सतत विकास के लिए नीतियां बनाए। इसमें बेहतर बाजार व्यवस्था, फसल बीमा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, कृषि ऋण उपलब्धता और उन्नत बीजों व तकनीकों तक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार का यह कदम छत्तीसगढ़ के कृषि प्रधान राज्य की पहचान को मजबूत करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करेगा, जिससे राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।

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