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ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ भारत बंद: छत्तीसगढ़ में 20,000 दुकानें बंद

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देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ 28 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया गया है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ में लगभग 20,000 मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) द्वारा बुलाए गए इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार का ध्यान ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्मों द्वारा नियमों के कथित उल्लंघन और पारंपरिक दवा व्यापारियों के सामने आ रही चुनौतियों की ओर खींचना है। इस एक दिवसीय हड़ताल से राज्य में दवा आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

क्या है पूरा मामला

यह विरोध प्रदर्शन कोई नया नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से पारंपरिक दवा व्यापारी ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। केमिस्टों का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम 1945 का उल्लंघन कर रही हैं। इन नियमों के तहत दवाओं की बिक्री के लिए सख्त दिशानिर्देश हैं, जिनमें डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होना और प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की देखरेख में ही दवा वितरण शामिल है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अक्सर इन नियमों की अनदेखी करते हुए बिना पर्ची के भी दवाएं बेचते हैं, जिससे दवाओं के दुरुपयोग और गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ जाता है। AIOCD का कहना है कि यह न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे नकली और घटिया दवाओं के बाजार में आने का भी खतरा रहता है।

छत्तीसगढ़ में व्यापक असर

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इस भारत बंद का छत्तीसगढ़ राज्य में गहरा असर देखने को मिलेगा, जहां 20,000 से अधिक मेडिकल स्टोर अपनी सेवाएं बंद रखेंगे। राजधानी रायपुर सहित राज्य के सभी प्रमुख शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में दवा दुकानें बंद रहेंगी, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं और अस्पतालों से जुड़ी फार्मेसियों को इस बंद से बाहर रखा जा सकता है, ताकि जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। फिर भी, आम जनता को अपनी नियमित दवाओं के लिए परेशानी झेलनी पड़ सकती है। स्थानीय दवा व्यापारियों ने लोगों से अपील की है कि वे 28 फरवरी से पहले अपनी आवश्यक दवाओं का स्टॉक कर लें ताकि असुविधा से बचा जा सके। छत्तीसगढ़ में AIOCD के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह कदम सरकार को हमारी गंभीर चिंताओं से अवगत कराने के लिए उठाया गया है।

ऑनलाइन दवा बिक्री के खतरे

दवा व्यापारी ऑनलाइन दवा बिक्री के कई खतरों को उजागर करते रहे हैं। सबसे प्रमुख चिंता दवाओं की गुणवत्ता और प्रामाणिकता को लेकर है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेची जाने वाली दवाओं की सोर्सिंग और भंडारण की प्रक्रिया कई बार अपारदर्शी होती है, जिससे नकली या घटिया दवाएं मिलने का जोखिम रहता है। इसके अलावा, एंटीबायोटिक्स और अन्य महत्वपूर्ण दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री से एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance) जैसी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। AIOCD का यह भी तर्क है कि यह छोटे और मध्यम वर्ग के दवा व्यापारियों के रोजगार को भी प्रभावित कर रहा है, क्योंकि वे बड़े ऑनलाइन प्लेयर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं। साइबर सुरक्षा और मरीजों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि इन प्लेटफॉर्मों पर संवेदनशील जानकारी का आदान-प्रदान होता है।

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सरकार से मांग और आगे की राह

AIOCD ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह ऑनलाइन दवा बिक्री के संबंध में स्पष्ट और कड़े नियम बनाए, या फिर इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित करे। संगठन का कहना है कि वर्तमान में लागू नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और ई-फार्मेसी कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब दवा व्यापारियों ने इस मुद्दे पर सरकार का दरवाजा खटखटाया है; पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो AIOCD ने भविष्य में और भी बड़े और देशव्यापी आंदोलनों की चेतावनी दी है। केमिस्टों का मानना है कि दवाओं का व्यापार एक संवेदनशील क्षेत्र है जिसे केवल व्यावसायिक लाभ के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।

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