13 जुलाई, 2026 को छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। दंतेवाड़ा और कांकेर जिलों में चलाए गए अलग-अलग सर्च ऑपरेशनों में नक्सलियों द्वारा छिपाए गए दो बड़े डंप बरामद किए गए। इन डंपों से 116 ग्राम सोने का बिस्कुट, 2 लाख रुपये नकद, विभिन्न हथियार, विस्फोटक और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 18 लाख रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई हाल ही में आत्मसमर्पित हुए माओवादियों से मिली सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर की गई, जिसने क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को एक बड़ा झटका दिया है।
बड़ी सफलता और रणनीति
छत्तीसगढ़ में लंबे समय से जारी नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों और स्थानीय खुफिया तंत्र की मजबूती के कारण नक्सलियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस नवीनतम कार्रवाई में, आत्मसमर्पित माओवादियों की मदद से नक्सलियों के गुप्त ठिकानों का पता लगाना रणनीति का एक अहम हिस्सा रहा है। यह दर्शाता है कि नक्सलियों के भीतर से मिल रही जानकारी उनके नेटवर्क को तोड़ने में कितनी कारगर साबित हो रही है। बरामद सामान में सोना और बड़ी मात्रा में नकदी मिलना इस बात का संकेत है कि नक्सली अपनी गतिविधियों के वित्तपोषण और संसाधनों के प्रबंधन के लिए किस तरह के तरीके अपनाते हैं। यह बरामदगी न केवल उनकी आर्थिक रीढ़ को कमजोर करती है, बल्कि उनके हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति श्रृंखला को भी बाधित करती है, जिससे उनकी हमला करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है।
दंतेवाड़ा में बरामदगी का विवरण
दंतेवाड़ा जिले में यह बड़ी कार्रवाई बारसूर थाना क्षेत्र के तोड़मा गांव के जंगल और पहाड़ी इलाके में की गई। पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने हाल ही में मुख्यधारा में लौटे माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर सघन तलाशी अभियान चलाया। सर्चिंग के दौरान, जंगल में जमीन के नीचे छिपाया गया एक बड़ा नक्सली डंप मिला। इस डंप से 116 ग्राम सोने का बिस्कुट, 2 लाख रुपये नकद, विभिन्न प्रकार के हथियार, विस्फोटक सामग्री, गोला-बारूद और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस बरामद सामान की कुल कीमत लगभग 18 लाख रुपये है। सुरक्षा बलों का कहना है कि नक्सलियों ने इन हथियारों और विस्फोटकों को भविष्य में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और बड़ी वारदातों को अंजाम देने के मकसद से छिपाकर रखा था। सोने और नकदी की बरामदगी नक्सलियों के लिए धन जुटाने के स्रोतों पर भी गंभीर प्रहार करती है, क्योंकि इसका उपयोग वे नए रंगरूटों को आकर्षित करने, सामग्री खरीदने और अपने कैडरों का समर्थन करने के लिए करते हैं।
कांकेर में भी बड़ी कार्रवाई
इसी क्रम में, कांकेर जिले में भी नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। 11 जुलाई को जिला पुलिस और बीएसएफ (BSF) की एक संयुक्त टीम कोयलीबेड़ा थाना इलाके में कांकेर और नारायणपुर बॉर्डर के पास आलपरस और गुमचुर के बीच जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में गश्त और सर्चिंग अभियान पर निकली थी। इस दौरान, सुरक्षा बलों को नक्सलियों का एक और छिपाया हुआ डंप मिला। इस डंप से महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई, जिसमें दो .303 राइफल, 31 कारतूस, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, वायरलेस बैटरी, रेडियो, नक्सली वर्दी, चार्जर, बैटरी और नक्सलाइट लिटरेचर शामिल हैं। संचार उपकरण और नक्सली साहित्य की बरामदगी उनकी आंतरिक संचार प्रणाली और विचारधारा के प्रचार-प्रसार को बाधित करती है, जो उनके संगठन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नक्सल विरोधी अभियान का व्यापक असर
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लगातार चलाए जा रहे अभियानों और आत्मसमर्पित माओवादियों से मिल रही सटीक खुफिया जानकारी के कारण नक्सलियों के ठिकानों और संसाधनों का लगातार भंडाफोड़ हो रहा है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि नक्सली अपनी पकड़ खो रहे हैं और उनके कैडर में भी बिखराव आ रहा है। इन सफलताओं से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है और उन्हें भविष्य के अभियानों के लिए नई ऊर्जा मिली है। यह कार्रवाई उन नक्सलियों के लिए भी एक संदेश है जो अभी भी हिंसा का रास्ता अपनाए हुए हैं कि सरकार और सुरक्षा बल उनकी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे और उन्हें जल्द ही आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना होगा। इस तरह की बरामदगी न केवल नक्सलियों की युद्धक क्षमता को कमजोर करती है, बल्कि स्थानीय आबादी में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और शांति की उम्मीदें बढ़ती हैं।






