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13 सीटों के साथ राज्यसभा में बहुमत के और करीब आई बीजेपी, जानें अब मंजिल कितनी दूर

 नई दिल्ली

देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के फाइनल नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें 26 निर्विरोध चुने गए तो 11 सीटों पर मतदान के जरिए फैसला हो सका है. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए को 22 सीटों पर जीत हासिल हुई है तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं है. राज्यसभा के इस चुनाव से बीजेपी की संसद के उच्च सदन में ताकत काफी बढ़ गई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी वह दूर है।

हालांकि, बीजेपी के अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन बहुमत का आंकड़ा 2024 में ही हासिल कर चुका. अब राज्यों में बीजेपी की ताकत बढ़ने के बाद उसकी ताकत संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा में भी बढ़ी है. इसकी का नतीजा है कि 10 राज्यों की 37  राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ही नहीं एनडीए की सीटें बढ़ गई है।

राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 है, जिसके लिहाज से बहुमत के लिए किसी भी दल को 123 सदस्यों की जरूरत होती है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के बाद बीजेपी का नंबर कितना हो गया है और बहुमत से कितनी दूर है. इसके अलावा 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों से सदन के गणित पर क्या असर पड़ेंगे? 

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राज्यसभा में बीजेपी बहुमत से कितनी दूर
देश के 10 राज्यों की जिन 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, वो सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी. चुनाव आयोग राज्यसभा सदस्यों के 6 साल के कार्यकाल पूरे होने से एक महीने पहले उनकी सीटों पर चुनाव करा लेता है. इसकी कड़ी में 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं.चुनाव से पूर्व बीजेपी के राज्यसभा में कुल 103 सांसद हैं, जिसमें से पार्टी के 9 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है।

9 राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल खत्म होने से बीजेपी की सीटें उच्च सदन में कम होकर 94 पर हो रही है, लेकिन बीजेपी ने 37 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में  13 राज्यसभा जीतने में कामयाब रही है. इस तरह बीजेपी की सीटें बढ़कर 107 हो गई हैं. बीजेपी की राज्यसभा सीटें पहले से चार ज्यादा हो रही हैं, लेकिन उसके बाद भी बहुमत से दूर है।

बीजेपी को राज्यसभा में अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए 16 राज्यसभा सीट की जरूरत है. बीजेपी को 16 राज्यसभा की सीटों को जिताने के लिए 2026 के जून और नवंबर के चुनाव का ही नहीं बल्कि 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि इसके बाद पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ा सकती है।

37 राज्यसभा सीटें के चुनाव से क्या बदलेगा?
देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं.इस तरह 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।

हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें ही मिल सकी हैं. राज्यसभा की जिन 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्य चुने गए हैं, उसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी।

राज्यसभा चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो 37 सीटों में एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं. इसमें बीजेपी को 13 सीटें मिली तो जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. विपक्ष को मिली 15 राज्यसभा सीटों में कांग्रेस ने 6 सीटें, टीएमसी ने 4 सीटें, डीएमके ने 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है।

चुनाव पहले और नतीजे आने के समीकरण को देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा तो विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान हुआ. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं।
राज्यसभा में एनडीए की कुल ताकत क्या है? 
राज्यसभा में एनडीए की चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का आंकड़ा 131 सदस्यों का था, लेकिन 37 सीटों पर नतीजे के बाद अब एनडीए गठबंधन के सदस्यों की संख्या 141 हो गई है. बीजेपी के 107, AIADMK के पांच, जेडीयू के 4, एनसीपी के 4, टीडीपी के 2, UPPL के दो, शिवसेना के 2, जेडीएस के 1, आरएलडी के एक, एजीपी के 1,आरएलएसएम के एक, एनपीप के एक, PMK के एक और निर्दलीय तीन राज्यसभा सदस्य हैं. इसके अलावा 6 मनोनीत राज्यसभा सदस्यों का समर्थन भी बीजेपी को है।

राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को झटका लगा है, उसकी सीटें घट गई हैं. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लाक' की सीटें राज्यसभा में 74 पर पहुंच गई हैं, उसमें कांग्रेस के पास 28 सीटें, टीएमसी की 13, डीएमके की 8, सपा की 4, सीपीआई (एम) की तीन, नेशनल कॉफ्रेंस की 3, आरजेडी की 3, सीपीआई की 2, मुस्लिम लीग की 2, जेएमएम, शरद पवार की एनसीपी की एक, शिवसेना (य़ूबीटी) की एक, डीएमडीके की एक और तीन अन्य दल के सदस्य हैं. 
 
एनडीए और इंडिया ब्लॉक से अलग रहने वाले दलों की संख्या राज्यसभा में देखें तो वह 28 है, उसमें आम आदमी पार्टी की 10, वाईएसआर कांग्रेस की 7, बीजेडी की 6, बीआरएस की 3, बसपा की एक की एमएनएफ की एक सीट है. इसके अलावा दो राज्यसभा खाली हैं. साथ ही यह भी बता दें कि राज्यसभा की 12 सीटों पर सदस्यों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है. ऐसे में बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए का नंबर उच्च सदन में बहुमत से ज्यादा है।

राज्यसभा में बहुमत से क्या हासिल करेगी
राज्यसभा में बहुमत से बीजेपी भले ही दूर है, लेकिन एनडीए के नंबर काफी मजबूत है. मोदी सरकार के लिए संसद में लोकसभा की तरह अब राज्यसभा में भी तमाम बिल पास कराना आसान हो गया है. राज्यसभा में बहुमत होने से फाइनेंशियल बिलों का पास होना सहज हो जाता है. ऐसे में कई बार देखा गया है जब बहुमत नहीं होता सरकार के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. राज्य सभा में कई बार ऐसी स्थिति हो जाती है कि विपक्ष जानता है कि ये ठीक क़ानून है लेकिन वह विरोध करती है, ऐसी सूरत नहीं आएगी।

संसद के दोनों सदनों में बहुमत होने से किसी भी दल के लिए अपने राजनीतिक विचारों को आगे बढ़ाना आसान हो जाता है. देखा गया है कि हर पार्टी अपने विचारों को बढ़ाना चाहेगी. जब बहुमत हो तो संविधान में बदलाव करने में भी आसानी होती है. बीजेपी के पास भले ही बहुमत नहीं है, लेकिन एनडीए के पास बहुमत से ज्यादा नंबर है।

Rana Sikander
लेखक / Author

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.

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