गुरुवार, 14 मई 2026 को केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर छाए सस्पेंस का आज अंत होने की संभावना है। कांग्रेस हाईकमान ने केरलम विधानसभा चुनावों में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए गहन मंथन पूरा कर लिया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच 40 मिनट की लंबी बातचीत के बाद, पार्टी आज शाम तक मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। इस दौड़ में निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष वी.डी. सतीशन और AICC महासचिव (संगठन) व सांसद के.सी. वेणुगोपाल सबसे आगे माने जा रहे हैं, जबकि केरल के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला भी एक दावेदार हैं।
मुख्यमंत्री पद पर मंथन और दावेदार
कांग्रेस आलाकमान ने केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख दावेदारों पर गहन विचार-विमर्श किया है। इनमें के.सी. वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश विधायकों ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया है, जो उन्हें इस दौड़ में एक मजबूत स्थिति में लाता है। वहीं, वी.डी. सतीशन ने पिछले पांच सालों से विपक्ष के नेता के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और उन्हें यूडीएफ की जीत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। पार्टी के कद्दावर नेताओं के बीच संभावित पावर शेयरिंग फॉर्मूला पर भी चर्चा चल रही है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के आंतरिक कलह से बचा जा सके। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पुष्टि की है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के बीच सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं, और घोषणा गुरुवार को की जाएगी।
कांग्रेस हाईकमान की फूंक-फूंककर कदम
केरल के मुख्यमंत्री पद के चयन में कांग्रेस हाईकमान की यह सावधानी पिछले कुछ सालों में विभिन्न राज्यों में हुए आंतरिक विवादों का सीधा परिणाम है। पार्टी ने राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चली खींचतान, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के बीच की टसल, और कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच हर तीन महीने में सामने आने वाली सत्ता संघर्ष की खबरों से सबक लिया है। सबसे बड़ा सबक मध्य प्रदेश से मिला, जहाँ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी तोड़ दी और कांग्रेस की सरकार गिर गई। इन अनुभवों के कारण, कांग्रेस आलाकमान इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और एक ऐसा फैसला लेना चाहता है जो न केवल सर्वमान्य हो बल्कि राज्य में पार्टी को स्थिरता भी प्रदान करे। यह देरी पार्टी के भीतर संभावित विद्रोह और गुटबाजी को रोकने की रणनीति का हिस्सा है।
सतीशन और वेणुगोपाल की दावेदारी का आधार
वी.डी. सतीशन की दावेदारी कई मजबूत आधारों पर टिकी है। वह पिछले पांच साल से केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय रहे हैं, और उन्होंने LDF सरकार के खिलाफ सदन में एक मजबूत और प्रभावी आवाज उठाई है। उनकी यह सक्रियता और UDF की जीत में उनका अहम योगदान उन्हें मुख्यमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार बनाता है। गुरुवार को उनके समर्थन में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पलायम शहीद स्मारक से मार्च भी निकाला, जिससे सड़कों पर उनके नाम की चर्चा जोरों पर है। इसके अतिरिक्त, उन्हें UDF के सहयोगी दलों, विशेष रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन प्राप्त है, जो 22 सीटों के साथ गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है। वहीं, के.सी. वेणुगोपाल की दावेदारी भी कम मजबूत नहीं है। वह AICC महासचिव (संगठन) के रूप में एक राष्ट्रीय चेहरा हैं और सांसद भी हैं। अधिकांश विधायकों का समर्थन उन्हें एक प्रमुख दावेदार बनाता है, जैसा कि शुरुआती रिपोर्टों और फोटो कैप्शन में बताया गया है।
आगे की राह और संभावित घोषणा
केरल के अगले मुख्यमंत्री को लेकर चल रही राजनीतिक उठापटक का आज गुरुवार, 14 मई 2026 को अंत होने की प्रबल संभावना है। कांग्रेस हाईकमान ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अपना फैसला अंतिम रूप दे दिया है। यह फैसला न केवल केरल में पार्टी के भविष्य को आकार देगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की रणनीति और आंतरिक लोकतंत्र की छवि पर भी इसका असर पड़ेगा। जिस तरह से पार्टी ने पिछले अनुभवों से सीखते हुए फूंक-फूंककर कदम रखे हैं, उससे उम्मीद है कि यह निर्णय सभी गुटों को साधते हुए एक स्थिर और प्रभावी सरकार प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए नेता के सामने राज्य के विकास और UDF गठबंधन को मजबूत बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। आज की घोषणा के साथ ही, केरल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा।










